तिरुवनंतपुरम: केरल विधानसभा में एक अप्रत्याशित घटनाक्रम में भाजपा के एकमात्र विधायक ओ राजगोपाल ने सदन में उस प्रस्ताव का समर्थन किया, जिसमें विवादित केंद्रीय कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग गई है और जिनके खिलाफ दिल्ली की सीमा पर किसान प्रदर्शन कर रहे हैं. Also Read - Farmers Protest: किसानों और सरकार के बीच नौवें दौर की वार्ता भी रही बेनतीजा, अगली मीटिंग 19 जनवरी को

केरल विधानसभा के विशेष सत्र में गुरुवार को मुख्यमंत्री पिनरई विजयन ने प्रस्ताव रखा, जिसे सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चे (एलडीएफ), विपक्षी कांग्रेस नीत संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चे (यूडीएफ) और भाजपा के समर्थन से सर्वसम्मति से पारित किया गया. Also Read - Kisan Andolan: किसानों और सरकार के बीच वार्ता जारी, कृषि मंत्री ने अन्नदाताओं से की अपने रुख को नरम करने की अपील

सत्र के बाद ओ राजगोपाल ने मीडियाकर्मियों से से कहा, ”प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया. मैंने कुछ बिंदुओं (प्रस्ताव में) के संबंध में अपनी राय रखी, इसको लेकर विचारों में अंतर था, जिसे मैंने सदन में रेखांकित किया.” उन्होंने कहा, ”मैंने प्रस्ताव का पूरी तरह से समर्थन किया.” Also Read - TMC सांसद नुसरत जहां ने भाजपा को बताया दंगा कराने वाला, मुसलमानों को कहा- उल्टी गिनती शुरू..

जब राजगोपाल का ध्यान इस ओर आकर्षित कराया गया कि प्रस्ताव में तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग की गई है, तब भी उन्होंने प्रस्ताव का समर्थन करने की बात कही. राजगोपाल ने कहा, ” मैंने प्रस्ताव का समर्थन किया और केंद्र सरकार को तीनों कृषि कानूनों को वापस लेना चाहिए.” उन्होंने कहा कि वह सदन की आम राय से सहमत हैं.” राजगोपाल ने कहा कि यह लोकतांत्रिक भावना है.

वहीं, वहीं, केरल बीजेपी के नेता केएस राधाकृष्णन ने कहा, ”मुझे समझ में नहीं आता कि श्री राजगोपाल जैसे व्यक्ति ने केंद्र सरकार के खिलाफ ऐसा आश्चर्यजनक कदम क्यों उठाया. मैं इसे नहीं समझ पा रहा हूं. हर कोई जानता है कि एक सदस्य कुछ भी नहीं कर सकता है, लेकिन उन्‍हें असंतोष व्यक्त करना चाहिए था. यह भाजपा की इच्छा और भावना के विरुद्ध है.


जब राजगोपाल से कहा गया कि वह पार्टी के रुख के खिलाफ जा रहे हैं तो उन्होंने कहा कि यह लोकतांत्रिक प्रणाली है और हमें सर्वसम्मति के अनुरूप चलने की जरूरत है.
हालांकि, विशेष सत्र के दौरान सदन में राजगोपाल ने चर्चा के दौरान कहा था कि नए कानून किसानों के हितों की रक्षा करेंगे और बिचौलियों से बचा जा सकेगा.