नई दिल्ली: रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल और भाजपा से राज्यसभा सदस्य डॉ. डीपी वत्स ने केंद्र में सत्तारूढ़ नरेंद्र मोदी सरकार और जम्मू-कश्मीर में बीजेपी-पीडीपी की गठबंधन सरकार की पत्थरबाजों के प्रति नरमी वाली नीति से अपनी असहमति जताते हुए अपना कड़ा रुख जताया  है. लेफ्टिनेंट जनरल पद से रिटायर्ड होकर बीजेपी से राज्यसभा सदस्य बने वत्स ने बीते 9 जून को एक बयान में कहा, ”मैंने पत्थर-फेंकने वालों के खिलाफ दर्ज केस वापस लिए जाने के बारे में पढ़ा है, लेकिन मेरा सोचना है कि जो पत्थर फेंक रहे हैं, उन्हें गोली मार देना चाहिए.”

बता दें कि बीते 7 जून को दौरे पर गए केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने घोषणा की थी कि जम्मू-कश्मीर में पत्थर फेंकने वाले सभी बच्चों के खिलाफ दर्ज केस वापस लिए जाएंगे. जम्मू-कश्मीर स्पोर्ट्स कॉन्क्लेव में कहा था, ” जब मैं दिल्ली में था, मैं अफ्शान आशिक (कश्मीरी फुटबॉलर) से मिला और उसने बताया कि वह भी पत्थर फेंकने की घटनाओं में शामिल रही, लेकिन चूंकि वह स्पोर्ट्स में शामिल रही थी, उसकी जिंदगी बदल गई थी.

केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा था कि बच्चे आसानी से बहकाए जा सकते हैं, लेकिन हम ये सच जानते हैं, यही वजह है कि हम पत्थरबाजी के सभी केस उनके खिलाफ वापस ले रहे हैं. स्पोर्ट्स आपकी जिंदगी में बदलाव ला सकता है.

10 हजार से ज्यादा पत्थरबाजों को माफी
जम्मू-कश्मीर में महबूबा मुफ्ती सरकार ने इसी साल फरवरी में पत्थरबाजी में शामिल 9,730 से ज्यादा लोगों को माफी देने की घोषण की थी. ये 2008 से 2017 के दौरान स्टोन पेल्टिंग में शामिल रहे हैं. सीएम मुफ्ती ने विधानसभा में लिखित उत्तर में बताया था, 9,730 लोगों के खिलाफ 1745 लोगों के खिलाफ लगे केस वापस लेने की स्वीकृति दी गई है. इससे पहले सीएम की गठित कमेटी ने 4000 से अधिक लोगों को पत्थरबाजी की छोटी घटनाओं में शामिल होने पर माफी दी थी. (इनपुट एजेंसी)