नई दिल्ली। भाजपा सांसद और दलित नेता उदित राज ने आज उन दावों पर सवाल किया कि भीमा-कोरेगांव में हिंसा के पीछे नक्सलियों का हाथ था. उन्होंने कहा कि ऐसा कहना वहां पर जमा हुए संविधान निर्माता बी आर आंबेडकर के अनुयायियों का अपमान है. उन्होंने घटना के पहले माहौल बिगाड़ने के लिए कुछ हिंदुवादी नेताओं पर दोष मढ़ा.

उदित राज ने उठाए सवाल

भीमा कोरेगांव हिंसा के लिए कथित माओवादी जुड़ाव के मामले में पुणे पुलिस द्वारा पांच लोगों की गिरफ्तारी के कुछ दिन बाद उदित राज ने कहा कि उन्हें आश्चर्य है कि क्या नक्सली लाखों दलितों को गोलबंद करने में सक्षम हैं? उदित राज ने कहा कि 2014 में बहुत सारी अपेक्षाओं के साथ भाजपा को वोट देने वाले समुदाय में निराशा और गुस्सा है. उन्होंने कहा कि पार्टी को उन वजहों की पड़ताल करनी चाहिए जिसे वह 2019 में अगले लोकसभा चुनाव के पहले सुधार सके.

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अमित शाह से भी की मुलाकात

भाजपा सांसद ने कहा कि दलितों के मुद्दे पर हाल में उन्होंने पार्टी अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात की और उन्हें अपने सुझाव दिए. उन्होंने घटना के पहले माहौल खराब करने के लिए शंभाजी भिडे और मिलिंद एकबोटे जैसे हिंदुवादी नेताओं पर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि कुछ नक्सली तत्व हो सकते हैं लेकिन यह विचार गलत है कि वे दलितों को लामबंद करने के पीछे थे.

उदितराज ने कहा कि नक्सली तत्व हो सकते हैं लेकिन क्या वहां जमा लाखों दलित नक्सली होंगे या उन्हें नक्सलियों ने गोलबंद किया होगा? यह आंबेडकर और आंबेडकरवादियों का अपमान है.

पुलिस का दावा

बता दें कि कि पुलिस ने दावा किया है कि नक्सलियों ने पीएम नरेंद्र मोदी को मारने की साजिश भी रची थी. कोरेगांव हिंसा के सिलसिले में पकड़े गए लोगों से पूछताछ में कई राज सामने आए. इन्हीं में से एक के कंप्यूटर से पुलिस को एक पत्र मिला जिसमें पीएम मोदी को मारने की मंशा जाहिर की जा रही थी और इसके लिए हथियार जुटाने की योजना थी. इस दावे के बाद सियासी नूराकुश्ती ने फिर जोर पकड़ लिया.