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श्रीनगर 20 मई: जम्मू एवं कश्मीर के सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के बीच एक बार फिर मतभेद सामने आए हैं। ताजा मामला अलगाववादी नेता सैयद अली गिलानी के पासपोर्ट से संबंधित है। पीडीपी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती जहां गिलानी को पासपोर्ट जारी करना चाहती हैं, वहीं भाजपा इसका सख्ती से विरोध कर रही है। गिलानी ने अपनी पत्नी और बेटे के साथ पासपोर्ट के लिए आवेदन दिया है, ताकि वह सऊदी अरब में रह रही अपनी बीमार बेटी को देखने जा सकें। Also Read - कब बहाल होगा जम्मू कश्मीर का राज्य का दर्जा? भाजपा बोली- पहले चुन कर की जा रही हत्याएं बंद हों

महबूबा मुफ्ती ने बुधवार को संवाददाताओं से कहा कि वह इस मामले पर नजर रखेंगी, ताकि गिलानी को पासपोर्ट मिल सके, क्योंकि यह एक मानवीय मुद्दा है। हालांकि इस मामले में आखिरी फैसला गृहमंत्रालय को लेना है। वरिष्ठ पीडीपी नेता और सांसद तारिक हमीद कर्रा भी गिलानी को पासपोर्ट देने के समर्थक हैं। यह भी पढ़े:करगिल में मुशर्रफ को करारा जवाब मिला था : राव इंद्रजीत

वहीं, भाजपा का कहना है कि गिलानी को केवल एक ही शर्त पर पासपोर्ट दिया जा सकता है कि वह राज्य के भारत में विलय को स्वीकार कर लें और देश के संविधान के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्त करें। भाजपा के प्रवक्ता खालिद जहांगीर ने संवाददाताओं को बताया, “जब तक आप यह स्वीकार नहीं करते कि आप भारत के नागरिक हैं और भारत के संविधान में आपकी निष्ठा है तब तक आप भारतीय पासपोर्ट के लिए कैसे आवदेन कर सकते हैं।”

गिलानी को वर्ष 2007, 2008 और 2011 में एक साल के लिए सीमित पासपोर्ट जारी किया गया था, लेकिन उस दौरान उन्होंने सऊदी अरब का दौरा नहीं किया था। गिलानी की पत्नी और उनका बेटा मंगलवार को यहां स्थित क्षेत्रीय पासपोर्ट दफ्तर गए थे। गिलानी के अलगाववादी संगठन के सूत्रों ने बताया कि वह औपचारिकताएं पूरी नहीं कर सकते, क्योंकि उन्हें नजरबंद रखा गया है।

पुलिस महानिदेशक के. राजेंद्र कुमार ने हालांकि इस दावे को खारिज किया है कि गिलानी को नजरबंद रखा गया है। महबूबा मुफ्ती ने यह भी कहा कि मीरवाइज उमर फरूख, शब्बीर शाह और मुहम्मद यासीन मलिक जैसे अन्य अलगाववादी नेताओं को भारतीय पासपोर्ट दिया गया है और उनमें से दो नेता विदेशी दौरा करते रहे हैं।