नई दिल्ली. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने असम में घुसपैठ पर एक बार कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को घेरा है. उन्होंने कहा है कि अकेले असम में 40 लाख घुसपैठिए हैं, जिनकी पहचान हो गई है. जल्द ही राहुल और उनकी कंपनी संसद में इसपर बवाल करने लगेगी. आप लोग क्यों डरे हुए हैं? आप लोग घुसपैठिए को लेकर डरे हुए हैं, लेकिन हमारे नागरिकों को लेकर नहीं, जिनकी बम ब्लास्ट में मौत हो जाती है.

बता दें कि यह पहल मौका नहीं है जब अमित शाह ने असम पर बयान दिया है. इससे पहले उन्होंने कहा था, भारत के संसाधनों पर भारतीयों का हक है. भारत कोई ‘धर्मशाला’ नहीं है जहां अवैध प्रवासी आकर बस जाएं. राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण (NRC ) देश के बुनियादी मसलों को सुलझाने का एक तरीका है और इसे भाजपा से नहीं जोड़ा जाना चाहिए.

सिर्फ बीजेपी से जोड़कर न देखें
शाह ने कहा था, ‘‘NRC को सिर्फ भाजपा से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए. यह देश के बुनियादी मसलों को सुलझाने का तरीका है. यह कैसे मुमकिन है कि कोई आए और यहां बस जाए? देश इस तरह नहीं चल सकता. यहां के नागरिक ही यहां रहने चाहिए और देश के संसाधनों पर उन्हीं का हक है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह देश कोई धर्मशाला नहीं है कि कोई आकर यहां बस जाए.’’

विपक्षी पार्टियों पर लगाया आरोप
इस मुद्दे पर विपक्षी पार्टियों को आड़े हाथ लेते हुए भाजपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि 70 साल से घुसपैठियों को वोट बैंक के तौर पर इस्तेमाल किया जाता रहा. वे देश के लिए खतरा हैं जबकि भाजपा देशहित में सख्त फैसले लेने में यकीन करती है. एनआरसी पर एक सवाल के जवाब में शाह ने कहा, ‘‘उनकी (घुसपैठियों की) पहचान होनी चाहिए. मतदाता सूची से उनके नाम हटाए जाने चाहिए. भाजपा का साफ मानना है कि उनकी पहचान कर उन्हें वापस भेजा जाना चाहिए. घुसपैठिये देश की सुरक्षा के लिए भी खतरा पैदा करते हैं.’’ गौरतलब है कि असम देश का एकमात्र राज्य है जहां एनआरसी है. एनआरसी का पूरा मसौदा 30 जुलाई को प्रकाशित किया गया था. इसमें कुल 3.29 करोड़ आवेदकों में से 2.9 करोड़ लोगों के नाम शामिल किए गए जबकि जिन लोगों के नाम शामिल नहीं किए गए, उन्हें अपनी नागरिकता साबित करने के लिए जरूरी दस्तावेज जमा कराने की मोहलत दी गई.