नई दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी, हाल के वर्षों में चुनावी रणनीति बनाने में अन्य सभी दलों पर भारी पड़ती रही है. 2014 के लोकसभा चुनाव और नरेंद्र मोदी के केंद्रीय सत्ता में आने के बाद, देश में हुए विभिन्न राज्यों के कई चुनाव इसके गवाह हैं. अब जबकि साल 2019 में अगले लोकसभा चुनाव होने हैं, पार्टी एक बार फिर से ‘चुनावी मोड’ में आने लगी है. इसका प्रमाण है, पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह द्वारा विभिन्न राज्यों में किया गया दौरा. भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने पिछले कुछ महीनों में देशभर की लगभग 400 संसदीय सीटों का दौरा कर लोकसभा चुनाव जीतने के लिए ‘यूनिक प्लान’ बना लिया है. शाह, इस बार का चुनाव अपनी ‘लोकसभा टोली’ की मदद से जीतना चाहते हैं. इसके लिए पार्टी ने देशभर में टोलियां गठित कर ली हैं. हर संसदीय सीट के लिए एक टोली.

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कार्यकर्ता जैसे, मगर थोड़ा हटकर
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की लोकसभा टोली, मूलतः भाजपा के समर्पित कार्यकर्ताओं की ही फौज है, जो पार्टी के लिए जमीनी आधार बनाने और उसे बढ़ाने का काम करती है. जिन इलाकों तक भाजपा की पहुंच बन चुकी है, उनमें पार्टी का आधार बनाए रखने के लिए टोली काम करती है. वहीं, जहां-जहां अभी पार्टी नहीं पहुंच पाई है, वहां तक भाजपा के संदेश पहुंचाने का जिम्मा इन टोलियों के पास है. साथ ही विभिन्न संसदीय सीटों के बारे में हर तरह के इनपुट, पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष तक पहुंचाने की बड़ी जिम्मेदारी भी इन टोलियों को दी गई है. इन्हीं इनपुट्स के आधार पर पार्टी अध्यक्ष अमित शाह चुनाव की रणनीति तैयार करते हैं और इसी के अनुरूप नेताओं तक फीडबैक पहुंचाया जाता है.

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पहले चरण का समापन 22 जुलाई को
2019 का लोकसभा चुनाव जीतने के लिए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह पिछले कई दिनों से लोकसभा-टोलियों के साथ संपर्क अभियान चला रहे हैं. इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक आगामी 22 जुलाई तक शाह का यह संपर्क अभियान पूरा हो जाएगा. शाह ने पहले चरण के अपने इस चुनाव-पूर्व दौरे में अब तक देश के 18 राज्यों का भ्रमण किया है. इन राज्यों की सभी लोकसभा सीटों पर बनी लोकसभा-टोलियों के साथ उन्होंने बैठक कर आवश्यक दिशा-निर्देश दे दिए हैं. आगामी 4 और 5 जुलाई को अमित शाह अपने इसी अभियान के क्रम में उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर और आगरा जाएंगे. अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, शाह ने राजस्थान, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, दिल्ली, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, दादरा एवं नगर हवेली, असम और उत्तर-पूर्व के राज्यों के 395 संसदीय सीटों का दौरा किया है. अपने इसी अभियान के तहत आज वे केरल के दौरे पर हैं.

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पहले होती थी टीम, इस बार टोली
अमित शाह की चुनावी रणनीति को लेकर उनके विपक्षी भी सतर्क रहते हैं. क्योंकि अपनी विशिष्ट चुनावी रणनीति को अमल में लाने के लिए शाह हर मोर्चे पर अपनी टीम को तैनात रखते हैं. ऐसा नहीं है कि 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए ही वे कुछ अलग योजना बना रहे हैं. इससे पहले के चुनावों के लिए भी अमित शाह विशेष तौर पर अपनी टीम तैयार करते थे. इन्हीं टीमों को इस बार लोकसभा-टोली का नाम दिया गया है. इन टोलियों की कार्य-योजना का निर्धारण भी शाह ही करते हैं और वे खुद इसकी निगरानी का भी जिम्मा संभालते हैं. समय-समय पर वे टोली के सदस्यों को विशेष दिशा-निर्देश देते हैं. साथ ही पार्टी की ओर से सौंपे गए कार्यों के लिए टोली के सदस्यों का मार्गदर्शन भी करते हैं. आखिरकार इन्हीं टोलियों से मिले फीडबैक के आधार पर अमित शाह को चुनाव के लिए विशेष रणनीति भी बनानी होती है.

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क्या करती है भाजपा की लोकसभा-टोली
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की लोकसभा-टोली का मूल काम, चुनाव से संबंधित ही होता है. किसी संसदीय क्षेत्र के लिए बनी लोकसभा-टोली के सदस्यों को निर्देश दिया गया है कि वह उस क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों, विचारकों, सोशल मीडिया एक्टीविस्ट्स, बुद्धिजीवियों आदि से निरंतर संपर्क बनाए रखे. टोली के सदस्य समय-समय पर इन लोगों से बातचीत के आधार पर मिले फीडबैक को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को देना होता है. टोली का एक काम यह भी है कि वह संबंधित संसदीय क्षेत्र की वोटर लिस्ट का वेरिफिकेशन करे. साथ ही एससी, एसटी और ओबीसी समुदाय के कम से कम दो दर्जन सदस्य बनाए. इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, टोली को यह भी निर्देश दिया गया है कि वह अपने क्षेत्र की स्थानीय मीडिया के साथ ‘अच्छे’ संपर्क रखे.