नई दिल्ली। जम्मू कश्मीर में तीन साल पुरानी बीजेपी-पीडीपी गठबंधन सरकार आज टूट गया. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के साथ जम्मू कश्मीर सरकार के बीजेपी मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं की बैठक के बाद महासचिव राम माधव ने ऐलान किया कि बीजेपी गठबंध सरकार से समर्थन वापस ले रही है. उन्होंने समर्थन वापस लेने की कई वजहें गिनाईं जिसमें सबसे बड़ी वजह थी घाटी में लगातार बिगड़ते हालात. क्या क्या कहा राम माधव ने पढ़ें.

राम माधव ने क्या-क्या कहा

-जम्मू-कश्मीर में गठबंधन सरकार आगे चलना संभव नहीं है. पीएम मोदी और अमित शाह से सलाह के बाद पीडीपी से समर्थन वापस लेने का फैसला किया गया है. बीजेपी ने अपनी तरफ से अच्छी तरह से सरकार चलाने की कोशिश की कश्मीर में जो काम हम करना चाह रहे थे, वो नहीं कर पा रहे थे.

-रमजान में सीजफायर के बावजूद अपेक्षित नतीजे नहीं निकल पाए. सीजफायर का फायदा उठाने की कोशिश की गई. देशहित और राज्य के हित में समर्थन वापसी का फैसला लिया गया है. सीजफायर का फैसला मजबूरी नहीं, हमारा दिल बड़ा था. हम घाटी में शांति चाहते थे.

-घाटी मेंआतंकवाद, हिंसा और कट्टरपंथ लगातार बढ़ता जा रहा है और आम लोगों के मूलभूत अधिकार खतरे में हैं. पत्रकार शुजात बुखारी की हत्या इसका प्रमाण है. उनकी कश्मीर में दिन दहाड़े हत्या कर दी गई.

जम्मू-कश्मीर में BJP-PDP गठबंधन टूटा, महबूबा सरकार से BJP ने लिया समर्थन वापस

-देश की सुरक्षा, एकता को ध्यान में रखते हुए ये फैसला लिया गया है. राज्य के हालात में सुधार के लिए हम मांग करते हैं कि यहां राज्यपाल शासन लगाया जाए. केंद्र ने घाटी के लिए सबकुछ किया. हमने एलओसी पर भी पाकिस्तान के साथ सीजफायर किया.

-पीडीपी अपने वायदे पूरे करने में नाकाम रही है. हमारे नेताओं को बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ा है. जम्मू और लद्दाख में विकास के कामों के लिए सरकार से मंत्रियों को सहयोग नहीं मिला.

-राज्य सरकार स्थिति को संभालने में कामयाब नहीं रही. सीएम दायित्व निभाने में नाकाम रहीं. गठबंधन का नेतृत्व पीडीपी के पास था.

-जम्मू लद्दाख में जितना काम होना था उसमें में हमारे मंत्रियों को अड़चनों का सामना करना पड़ा. जम्मू लद्दाख की जनता भेदभाव महसूस करने लगी थी.

-व्यापक देशहित में हमने ये फैसला लिया है. हम वहां राज्यपाल शासन की मांग करते हैं. राज्यपाल शासन में कश्मीर के हालात सुधरने की उम्मीद है.

विधानसभा में कुल 89 सीटें 

बता दें कि जम्मू कश्मीर विधानसभा में कुल 89 सीटें हैं. पिछले चुनाव में पीडीपी को 28 सीटें, बीजेपी को 25 सीटें, नेशनल कांफ्रेस को 15 सीटें, कांग्रेस को 12 सीटें मिली थीं. त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में धुर विरोधी बीजेपी-पीडीपी ने मिलकर सरकार बनाने का फैसला किया. लेकिन इन तीन सालों के दौरान दोनों के रिश्ते कभी भी सहज नहीं रहे. दोनों पार्टियां एक दूसरे के खिलाफ खुलकर बयान देती रही. बीजेपी मंत्रियों ने कई मौकों पर अपनी नाराजगी खुलकर जताई.