नई दिल्ली: कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने नियुक्तियों और पदोन्नति में आरक्षण के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले को लेकर सोमवार को नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि आरक्षण को खत्म करने की मंशा रखना भाजपा एवं आरएसएस के डीएनए में है. बता दें कि गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा है कि पदोन्न्ति में आरक्षण मौलिक अधिकार नहीं है.

गांधी ने यह भी कहा कि भाजपा और आरएसस कितना भी प्रयास कर ले, लेकिन कांग्रेस एससी, एसटी और ओबीसी के आरक्षण को खत्म नहीं होने देगी. उन्होंने संसद परिसर में मीडियाकर्मियों से बातचीत में आरोप लगाया, ”ये (सरकार) आरक्षण के खिलाफ है. ये किसी न किसी तरह से आरक्षण को संविधान से निकालना चाहते हैं. इनकी तरफ ऐसे प्रयास होते रहते हैं. ये चाहते हैं कि एससी-एसटी समुदाय आगे नहीं बढ़ें.”


लेकिन हम आरक्षण को हटने नहीं देंगे
कांग्रेस नेता ने कहा, ”अब फैसला आया कि आरक्षण मौलिक अधिकार नहीं है. यह सब उत्तराखंड की सरकार ने शीर्ष न्यायालय में कहा है. यह आरक्षण को निरस्त करने का भाजपा का तरीका है.” उन्होंने कहा, ”भाजपा और आरएसएस वाले कितना भी प्रयास कर लें, लेकिन हम आरक्षण को हटने नहीं देंगे, क्योंकि आरक्षण संविधान का एक तरह से प्रत्यक्ष हिस्सा है.”

चाहे मोदी जी या मोहन भागवत सपना देखें, हम आरक्षण को मिटने नहीं देंगे
गांधी ने सरकार पर आरोप लगाया, ”संविधान पर हमला हो रहा है. लोगों को बोलने नहीं दिया जाता. ये न्यायपालिका पर दबाव बनाते हैं. संविधान के स्ंतभों को एक-एक करके तोड़ रहे हैं.” उन्होंने दावा किया, ”भाजपा और आरएसएस के डीएनए में है कि उनको आरक्षण चुभता है और वे इसे मिटाना चाहते हैं. मैं एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के लोगों से कहना चाहता हूं कि चाहे मोदी जी या मोहन भागवत सपना देखें, हम आरक्षण को मिटने नहीं देंगे.”

नौकरियों, पदोन्नतियों में आरक्षण देने के लिए राज्य सरकारें बाध्य नहीं है: सुप्रीम कोर्ट
बीते 9 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राज्य सरकारें नियुक्तियों में आरक्षण देने के लिए बाध्य नहीं है और पदोन्नति में आरक्षण का दावा करने का कोई मूल अधिकार नहीं है. न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता की पीठ ने कहा, ‘‘इस न्यायालय द्वारा निर्धारित कानून के मद्देनजर इसमें कोई शक नहीं है कि राज्य सरकारें आरक्षण देने के लिए बाध्य नहीं है. ऐसा कोई मूल अधिकार नहीं है जिसके तहत कोई व्यक्ति पदोन्नति में आरक्षण का दावा करे.

याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए शीर्ष न्यायालय ने यह टिप्पणी की
पीठ ने अपने फैसले में कहा था, न्यायालय राज्य सरकार को आरक्षण उपलब्ध कराने का निर्देश देने के लिए कोई परमादेश नहीं जारी कर सकता है. उत्तराखंड सरकार के पांच सितंबर 2012 के फैसले को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए शीर्ष न्यायालय ने यह टिप्पणी की.