महाराष्ट्र में अगली सरकार का नेतृत्व कौन करेगा इसको लेकर भाजपा और शिवसेना के बीच खींचतान जारी है. शिवसेना जहां 50:50 के फॉर्मूले यानी ढाई-ढाई साल के सीएम पर अड़ी है, वहीं भाजपा किसी भी कीमत पर सीएम पद छोड़ने को राजी नहीं है. ऐसे में बीच का रास्ता क्या हो सकता है? इसको लेकर मीडिया में खबरें आने लगी हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सीएम पद छोड़ने की स्थिति में शिवसेना राज्य के अहम मंत्रालयों जैसे गृह, शहरी विकास और राजस्व को अपने खाते में चाहेगी.

इस बारे में हिंदुस्तान टाइम्स ने शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के एक करीबी के हवाले से खबर छापी है. इसमें कहा गया है कि अगर भाजपा 50:50 के फॉर्मूले पर तैयार नहीं होती है तो उनकी पार्टी मंत्रालयों के बराबर-बराबर बंटवारे के साथ अहम मंत्रालयों की मांग करेगी. उक्त नेता ने कहा कि यह स्पष्ट है कि भाजपा हमारे बिना सरकार नहीं बना सकती है. उस स्थिति में उन्हें हमें सत्ता में समान भागीदार बनाना होगा. उन्होंने कहा कि अगर हमारा मुख्यमंत्री नहीं होगा तो हम अहम मंत्रालयों की मांग करेंगे. अगर वे इसके लिए भी तैयार नहीं होते हैं तब समस्या पैदा हो जाएगी.

गौरतलब है कि शिवसेना-भाजपा गठबंधन की 1995 से 1999 तक राज्य में सरकार बनी थी. उस वक्त भी इसी फॉर्मूले को आजमाया गया था. उस वक्त सीएम पद शिवसेना के पास था तो गृह सहित कई अहम मंत्रालय भाजपा के पास थे.

उधर, मंगलवार को देवेंद्र फडणवीस के कहा कि दोनों ही पक्ष अनौपचारिक रूप से पावर-शेयरिंग के फॉर्मूले पर चर्चा कर रहे हैं. दोनों पार्टियों के सूत्रों ने बताया कि मंत्रालयों की संख्या और विभागों के बंटवारे के बारे में अनौपचारिक रूप से बातचीत चल रही है. भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री पद को साझा नहीं करने के बदले, शिवसेना ने संकेत दिया है कि वह सरकार में मंत्रियों की संख्या और प्रमुख विभागों का समान रूप से बंटवारा चाहती है.