नई दिल्ली/रायपुर. छत्तीसगढ़ में वोटिंग के बाद चुनावी नतीजे और सरकार बनाने के जोड़-तोड़ पर चर्चा शुरू हो गई है. जिस तरह से पिछले दो चुनावों में बीजेपी और कांग्रेस के बीच वोट फीसदी का अंतर घटा है, उसे दखते हुए दोनों पार्टियों की नजर अजीत जोगी और मायावती पर है. हालांकि, दोनों पार्टियां पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने का दावा कर रही हैं, लेकिन गृहमंत्री राजनाथ सिंह के बयान, ‘अजीत जोगी हमारे मित्र हैं’ को राज्य में नए बनते समीकरण के तौर पर भी देखा जा रहा है. माना जा रहा है कि बीजेपी को उम्मीत के अनुसार सीटें नहीं मिलती हैं तो वह जोगी और मायावती को साथ ले सकती है. Also Read - शिवराज सरकार ने स्वीकारा- हाँ, कांग्रेस सरकार ने माफ़ किया था 27 लाख किसानों का कर्ज

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छत्तीसगढ़ में साल 2008 के चुनाव में बीजेपी को 40.33% वोट मिले और कांग्रेस को 41.50% वोट मिले. ऐसे में देखा जाए तो वोट शेयर के हिसाब से कांग्रेस इस चुनाव में बीजेपी से आगे थी. लेकिन सीटों की बात करें तो बीजेपी कहीं आगे रही थी. बीजेपी को जहां 50 सीटें मिली थीं, वहीं कांग्रेस को 38 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा था.

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साल 2013 का समीकरण

छत्तीसगढ़ में साल 2013 में बीजेपी को 41.4% वोट मिले. दूसरी तरफ कांग्रेस को 40.29% वोट मिले. ऐसे में दोनों पार्टियों के वोट शेयर का अंतर 0.7% रहा, जो 1% से भी कम है. बीजेपी 49 सीट पर आ गई और कांग्रेस 39 सीट पर. लेकिन ये वोट शेयर इतने कम हैं कि थोड़े मार्जिन से पूरा चुनाव उल्टा पड़ सकता है. ऐसे में बीजेपी दूसरे समीकरण को भी तैयार करने में लगी है.

हर बिंदु पर ध्यान दे रही है बीजेपी

पिछले दो चुनावों के पैटर्न को देखें तो बीजेपी की चिंता बढ़ सकती हैं. बीजेपी ऐसी सीटों पर भी नजर बनाए हुई है, जहां निर्दलीय प्रत्याशी ने मजबूत चुनाव लड़ा है. दूसरी तरफ जोगी-मायावती गठबंधन से भी मदद ले सकती है. बीजेपी इसके पीछे कर्नाटक को देख रही है, जहां ज्यादा सीटें जीतने के बाद भी वह सरकार नहीं बना पाई थी. ऐसे में पार्टी को राजनाथ सिंह के बयान का सहारा है और वह हर संभावना पर ध्यान दे रही है.

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