भोपाल: देश भर में नागरिकता विधेयक के खिलाफ प्रदर्शन जारी है. इस विरोध प्रदर्शन में छात्रों के साथ पेशेवर और सियासी लोग भी शामिल हो रहे हैं. इस पारित बिल को लेकर पिछले कई दिनों से राजनीति भी खूब चल रही है. सत्ताधारी पक्ष इस बात का दावा कर रहा है कि इस विरोध प्रदर्शन के पीछे का मास्टरमाइंड विपक्षी दल है वहीं विपक्ष इस बिल को असंवैधानिक करार कर रहा है. इसी सिलिसिले में बीते दिनों मध्य प्रदेश कांग्रेस की तरफ से आयोजित ‘संविधान बचाओ न्याय शांति यात्रा’ के दौरान मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा था कि मध्यप्रदेश में जब तक कांग्रेस की सरकार है कोई भी संविधान विरोधी, जन विरोधी और धर्म विरोधी कानून राज्य में लागू नहीं होगा.

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और इसी के जवाब में मुख्यमंत्री कमलनाथ के नेतृत्व में निकाली गई ‘संविधान बचाओ न्याय शांति यात्रा’ को भाजपा ने संविधान के खिलाफ बताते हुए कहा है कि मुख्यमंत्री और उनके मंत्री अब पद पर रहने के लायक नहीं हैं. भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिंह ने बुधवार को बयान जारी कर मुख्यमंत्री कमलनाथ के नेतृत्व में निकली ‘संविधान बचाओ न्याय शांति यात्रा’ पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, “यह लोकतंत्र के लिए शर्म की बात है कि एक संवैधानिक पद पर बैठा हुआ व्यक्ति उसी संविधान की सार्वजनिक रूप से धज्जियां उड़ा रहा है, जिसकी शपथ लेकर वह मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठा हो.

यह करने के बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ और उनके मंत्री पद पर बने रहने के लायक नहीं रह गए हैं. उन्हें या तो तत्काल अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे देना चाहिए या फिर देश और प्रदेश की जनता से माफी मांगनी चाहिए.” सिंह ने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करते हुए संसद के दोनों सदनों ने पारित किया है. इसके बाद देश के राष्ट्रपति ने इस पर हस्ताक्षर किए हैं और अब यह कानून देश के संविधान का अंग बन गया है. अब इस कानून का पालन करना किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की न सिर्फ जिम्मेदारी है, बल्कि परम कर्त्व्य भी है. ऐसे में मुख्यमंत्री कमलनाथ द्वारा प्रदेश में इस कानून को लागू न करने की बात कहना संविधान की सत्ता को चुनौती देने जैसा है.

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सिंह ने यात्रा पर सवाल उठाते हुए कहा कि नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में शांति मार्च का नेतृत्व करने वाले मुख्यमंत्री कमलनाथ को पहले लोगों को इस कानून की सच्चाई बतानी चाहिए थी. उन्हें लोगों को यह स्पष्ट करना चाहिए था कि यह नागरिकता देने वाला कानून है, छीनने वाला नहीं. अगर उन्हें लगता है कि इस कानून से किसी को नुकसान है, तो वह क्यों और किस प्रावधान के कारण है, यह बताना चाहिए था. लेकिन मुख्यमंत्री ने यह तो किया नहीं, उल्टे लोगों को गुमराह किया और उन्हें इस कानून के खिलाफ भड़काया.

इनपुट-आईएनएस