नई दिल्ली. उपचुनाव के नतीजे बीजेपी के लिए चिंता की लकीरें खींचने वाले हैं. 11 विधानसभा और 4 लोकसभा सीटों पर हुए चुनाव में उसे सिर्फ 1 विधानसभा की और 2 लोकसभा की सीट मिली हैं. रिजल्ट के बाद पार्टी के लिए सिर्फ विपक्षी एकता ही चिंता की बात नहीं है, बल्कि उसके लिए बड़ी समस्या उसका घटता वोट शेयर है.

कैराना
कैराना का रिजल्ट इस बात को बेहतर तरीके से बयां करता है. साल 2014 के चुनाव में बीजेपी को यहां 50.06 फीसदी वोट मिले थे. अगर पार्टी अपने इस वोट शेयर को दोहरा लेती तो किसी तरह का गठबंधन उसे हरा नहीं पाता. ऐसा ही कुछ फूलपुर और गोरखपुर के उपचुनाव में भी देखने को मिला था.

महाराष्ट्र
वहीं, अन्य तीन लोकसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में वोट शेयर की बात करें तो यहां भी चिंता की ही बात है. महाराष्ट्र के पालघर और भंडारा-गोंडिया सीट पर बीजेपी के वोट शेयर 9 और 23 फीसदी तक घटे हैं. हालांकि, साल 2014 के चुनाव में शिवसेना के गठबंधन के साथ वह मैदान में थी. इस वजह से बीजेपी के वोट शेयर में कितनी कमी आई इसे स्पष्ट रूप से यहां नहीं कहा जा सकता. दूसरी तरफ देखें तो कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन को भंडारा-गोंडिया में 8 फीसदी ज्यादा वोट मिले. नागालैंड की बात करें तो यहां एनडीए गठबंधन ने अपना प्रदर्शन दोहरा ही है.

विधानसभा सीट
10 विधानसभा सीटों की बात करें तो बीजेपी के वोट शेयर यहां भी कम हुए हैं. हालांकि, महाराष्ट्र में उसे बढ़त मिली है और पश्चिम बंगाल में वह दूसरे नंबर पर आने में कामयाब रही है. नूरपुर विधानसभा सीट पर बीजेपी का वोट शेयर 39 फीसदी से 47.02 फीसदी तक बढ़ा है. लेकिन यह विपक्षी एकता के सामने बौना ही साबित हुआ.

केरल
केरल में देखा जाए तो चेनागन्नौर में उसका वोट शेयर 29.3 फीसदी से घटकर 23.2 फीसदी आ गया. हालांकि, नायर कम्युनिटी की मजबूत पकड़ से बीजेपी को यहां कुछ बेहतर करने की उम्मीद थी.