नई दिल्ली. केंद्र सरकार के प्रति लगातार हमलावर होते जा रहे विपक्ष और कांग्रेस के तीखे हो रहे तेवरों के बीच, भाजपा आज देश के इतिहास का काला पन्ना उधेड़ेगी. प्रेस की आजादी और अभिव्यक्ति के अधिकार को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष अपने भाषणों में लगातार भाजपा को घेरते रहे हैं. कांग्रेस के सभी नेता भाजपा सरकार पर प्रेस पर पाबंदी लगाने का आरोप लगाते हैं. इन सारे आरोपों का जवाब देने का दिन, आज है. आज, यानी 25 जून. देश में आपातकाल की घोषणा का 43वां साल. दरअसल, वर्ष 1975 की 25-26 जून की रात को ही देश में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आपातकाल लगाने की घोषणा की थी. आज इस काले दिन की घोषणा के 43 साल बाद भाजपा, कांग्रेस के देश को दिए सबसे बड़े घाव को कुरेदेगी. पार्टी आज देशभर में आपातकाल विरोधी दिवस मना रही है. Also Read - एकनाथ खडसे ने भाजपा छोड़ कहा- देवेंद्र फडणवीस ने मेरा जीवन बर्बाद किया, NCP में शामिल होऊंगा

गुजरात में अमित शाह करेंगे मीसा कानून के प्रभावितों का सम्मान
दिल्ली प्रदेश भाजपा ने कहा कि जनता के मौलिक अधिकारों का हनन किए जाने के विरोध में 25 जून को पार्टी आपातकाल विरोधी दिवस मनाएगी. इस अवसर पर प्रदेश भाजपा आपातकाल बंदी स्मरण समिति की ओर से सोमवार शाम एक कार्यक्रम का आयोजन होगा. ऐसे ही कार्यक्रम देशभर के अलग-अलग राज्यों में किए जाएंगे. वहीं, भाजपा की गुजरात इकाई का दो दिवसीय चिंतन शिविर अहमदाबाद में चल रहा है. इस शिविर के दूसरे दिन के कार्यक्रम में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी भाग लेंगे. वे अपने संबोधन में लोगों को आपातकाल के दिनों की याद दिलाएंगे. हमारी सहयोगी वेबसाइट जीन्यूज.कॉम के अनुसार पार्टी ने एक बयान जारी कर बताया कि अमित शाह एक कार्यक्रम में भी शिरकत करेंगे, जहां पर आपातकाल में मीसा (MISA) कानून से प्रभावित हुए लोगों का अभिनंदन किया जाएगा. बता दें कि गुजरात भाजपा का यह चिंतन शिविर 2019 के लोकसभा चुनाव के मद्देनजर आयोजित किया जा रहा है. Also Read - वादा तेरा वादा.....बिहार चुनाव में लगी वादों की झड़ी, किस पार्टी ने जनता से क्या की है प्रॉमिस, जानिए

इमरजेंसी की दौर के युवा, आज के वरिष्ठ नेता
इमरजेंसी ने देश के इतिहास में भले एक काला अध्याय जोड़ दिया हो, लेकिन इसने देश को कई ऐसे नेता भी दिए, जो आज विभिन्न पार्टियों के वरिष्ठ पदों पर हैं. इंदिरा गांधी की सरकार के खिलाफ मुखर होकर विरोध करने वाले मुलायम सिंह यादव, अरुण जेटली, नीतीश कुमार, लालू यादव, रामविलास पासवान जैसे युवा नेताओं की बुनियाद बनाने में आपातकाल का महत्वपूर्ण योगदान है. वहीं, कांग्रेस में भी कमलनाथ, अंबिका सोनी, माधवराव सिंधिया, संजय सिंह जैसे नेताओं की जमीन बनाने में भी इस दौर का योगदान है. देश में गैर-कांग्रेसी सरकार की स्थापना भी इमरजेंसी की ही देन है. इसी का प्रभाव था कि आगे चलकर अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में संपूर्ण रूप से गैर-कांग्रेसी सरकार बनी. Also Read - महाराष्ट्र में BJP को बड़ा झटका- एकनाथ खडसे ने छोड़ा पार्टी का साथ- NCP में होंगे शामिल?