नई दिल्ली| गुजरात में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) अपनी सत्ता बरकरार रखने में सफल रही है. भारतीय जनता पार्टी ने कुल 99 सीटों पर जीत दर्ज की है. बीजेपी ने पूरे गुजरात व दिल्ली में जीत की खुशी मनाई, हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ताबड़तोड़ चुनावी अभियान के बावजूद पार्टी बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह द्वारा गुजरात में 150 सीटें जीतने के दावे से बहुत दूर रह गई और पार्टी यहां संभवत: 2012 के विधानसभा चुनाव से 16 सीटें कम जीत सकी है.

गुजरात चुनाव: यहां देखें विजेताओं की पूरी लिस्ट

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इस चुनाव में कांग्रेस ने भी राहुल गांधी के नेतृत्व में अच्छा प्रदर्शन किया. पाटीदार नेता हार्दिक पटेल, दलित नेता जिग्नेश मेवानी और ओबीसी नेता अल्पेश ठाकोर से हाथ मिला कर कांग्रेस के मत प्रतिशत में इजाफा हुआ है. पार्टी ने 2014 लोकसभा चुनाव में यहां 33.45 प्रतिशत मत पाए थे, जबकि इस चुनाव में पार्टी को 41.4 प्रतिशत मत मिले हैं. कांग्रेस पार्टी के इस प्रदर्शन से विपक्षी दलों में नई उर्जा आई है. 2019 में मोदी को चुनौती देने की योजना बना रही विपक्षीय पार्टियों के लिए कांग्रेस का गुजरात में प्रदर्शन उत्साह बढाने वाला है.

अगर राहुल गांधी ने अपनी आक्रामकता इसी तरह बरकरार रखी तो इसका खामियाजा बीजेपी को भुगतना पड सकता है. राहुल गांधी की लोकप्रियता बढती जा रही हैं, उनकी छवि भी बदली हैं. वह बीजेपी के हिंदुत्व का जवाब सॉफ्ट हिंदुत्व से दे रहे हैं. उनकी सभाओं में भी काफी लोग आ रहे हैं. इन सभी चीजों से बीजेपी को सबक लेना होगा.

2018 में 4 बड़े राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं. कर्नाटक में कांग्रेस की स्थिति अच्छी है. अगर वहां सिद्धारमैया को खुली छूट दे दी गई तो कांग्रेस सत्ता में बनी रह सकती है. मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में बीजेपी की सरकारों के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर नजर आ रही है. गुजरात में कांग्रेस के प्रदर्शन से वहां के कांग्रेसी नेताओं का उत्साह बढ़ गया है. वह अब और आक्रामकता से बीजेपी का सामना करेंगे. राजस्थान और मध्य प्रदेश में कांग्रेस के पास गहलोत और ज्योतिरादित्य सिंधिया जय नेतृत्व भी हैं.

ग्रामीण इलाकों में कांग्रेस की बढती लोकप्रियता भी बीजेपी के लिए परेशानी का सबब है. मध्य प्रदेश में किसानो की समस्या शिवराज  सरकार के लिए मुसीबत बन सकती है. अगर कांग्रेस सही रणनीति से उतारी तो वहां भी उन्हें अच्छा समर्थन मिल सकता है.

यदि राहुल गांधी सभी विपक्षीय दलों को एकजुट करने में कामयाब हुए तो 2019 में मोदी की राह आसन नहीं होगी. बीजेपी को अब आर्थिक सुधार, रोजगार के मौके बनाने और किसानों के कल्याण के मोर्चों पर काम करना होगा.