नई दिल्ली: राम मंदिर का मुद्दा 1989 के लोकसभा चुनावों के बाद से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के चुनावी घोषणापत्र का एक हिस्सा रहा है. उस समय हालांकि भाजपा ने विवादित स्थल पर मंदिर निर्माण के बारे में नहीं कहा था. उस समय भाजपा के घोषणा पत्र में कहा गया था, “1948 में भारत सरकार द्वारा निर्मित सोमनाथ मंदिर की तर्ज पर अयोध्या में राम जन्म मंदिर के पुनर्निर्माण की अनुमति नहीं दी गई तो गंभीर रूप से तनाव बढ़ेगा और इससे सामाजिक सौहार्द बिगड़ेगा.” इसके बाद 1991 में अगले चुनाव में पार्टी ने कहा कि उसका यह दृढ़ विश्वास है कि भगवान राम के जन्मस्थान पर राम मंदिर का निर्माण हमारी सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक है.

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दिसंबर 1992 में हिंदुओं की भीड़ ने बाबरी मस्जिद को गिरा दिया और जल्द ही यहां भगवान राम को समर्पित एक भव्य मंदिर को बनाने का संकल्प लिया. 1996 में, जिस साल भाजपा को पहली बार केवल 13 दिनों के लिए सत्ता मिली थी, उस समय भी पार्टी ने अपने घोषणापत्र में अयोध्या में एक शानदार राम मंदिर का निर्माण करने का वादा किया. 1998 में जब भाजपा ने आखिरकार अपनी गठबंधन सरकार बनाई तो उसने एक भव्य श्री राम मंदिर बनाने का अपना वादा दोहराया, जहां पहले से ही एक अस्थायी मंदिर मौजूद था. पार्टी ने साथ ही यह भी कहा कि भाजपा इस मसले को खत्म करने के लिए सभी सहमति, कानूनी और संवैधानिक साधनों का पता लगाएगी. इसके बाद 1999 में जब भाजपा ने विश्वास मत हारने के बाद सत्ता में वापसी की, तो पार्टी ने गठबंधन में अपने कई सहयोगियों को खुश करने के लिए मंदिर मुद्दे से दूरी बनाए रखी.

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भाजपा के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने 2004 के घोषणापत्र में कहा, “राजग का मानना है कि अयोध्या मुद्दे का जल्द और सौहार्दपूर्ण समाधान राष्ट्रीय एकीकरण को मजबूत करेगा. हम इस मामले में न्यायपालिका के फैसले को जारी रखना चाहते हैं, जो सभी द्वारा स्वीकार किया जाना चाहिए.” 2009 में भाजपा ने कहा कि अयोध्या में राम की जन्मभूमि पर एक भव्य मंदिर होने की लोगों की अत्यधिक इच्छा है. पार्टी ने इस निर्माण को सुविधाजनक बनाने के लिए सभी संभावनाओं का पता लगाने का वादा किया. भाजपा ने 2014 के घोषणापत्र में भी इस वादे को दोहराया और कहा, “अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण की सुविधा के लिए संवैधानिक ढांचे के अंदर सभी संभावनाओं का पता लगाया जाएगा.”

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सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को केंद्र को तीन महीने के अंदर एक ट्रस्ट बनाने का निर्देश दिया, जो अयोध्या में विवादित स्थल पर मंदिर बनाएगा. सर्वसम्मत फैसले में प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच-सदस्यीय पीठ ने अयोध्या में 2.77 एकड़ विवादित भूमि हिंदुओं को दी. इसके साथ ही अदालत ने सरकार को सुन्नी वक्फ बोर्ड को पांच एकड़ वैकल्पिक भूमि देने के निर्देश दिए. फैसला सुनाए जाने के बाद भाजपा ने कहा कि वह हमेशा राम मंदिर के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध रही है और इसने इस मुद्दे पर ईमानदार और सकारात्मक भूमिका निभाई है.

(इनपुट-आईएएनएस)