नई दिल्‍ली: हमारे बिहार में एक पुरानी परंपरा है. सामूहिक भोजों में जब खाने के व्‍यंजन तैयार हो जाते हैं तो भोज शुरू होने से पहले उनमें तुलसी के एक-दो पत्‍ते डाल दिए जाते हैं. इसका शुद्धता से कोई संबंध नहीं है, बल्कि यह इस बात की कोशिश होती है कि भोज में कोई सामान कम न पड़ जाए. लेकिन यह बात बिहार की है. यदि ऐसा कुछ कर्नाटक जैसे दक्षिणी राज्‍य में देखने को मिले तो आश्‍चर्य होता है. वो भी राजनीति से भला इसका क्‍या संबंध हो सकता है.

कर्नाटक विधानसभा चुनावों में काउंटिंग की शुरुआत पोस्‍टल बैलट से हुई और शुरुआती रुझानों में कांग्रेस तथा बीजेपी के बीच कांटे की टक्‍कर दिखी. लेकिन फिर शुरू हुई ईवीएम के वोटों की गिनती और बाजी पलटने लगी. कांग्रेस और बीजेपी के बीच सीटों का फासला बढ़ने लगा और शाम होते-होते तस्‍वीर पूरी तरह बदल चुकी थी. बीजेपी राज्‍य में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी और कांग्रेस के कब्‍जे से एक और बड़ा राज्‍य निकल गया.

इसका एक दूसरा पक्ष भी है. कर्नाटक चुनावी नतीजों में कांग्रेस को मिले वोटों का प्रतिशत बीजेपी से ज्‍यादा है. चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक कांग्रेस को 37.9 फीसदी वोट मिले हैं जबकि बीजेपी को 36.2 फीसदी. यानी 1.7 फीसदी ज्‍यादा वोट हासिल कर भी कांग्रेस को बीजेपी से करीब 26 सीटें कम मिली हैं. हालांकि, अभी सभी सीटों के नतीजे अभी नहीं आए, लेकिन इन आंकड़ों में थोड़े-बहुत फेरबदल की ही उम्‍मीद है.

चुनावी गणित को समझने वाले लोग इसे राज्‍य में त्रिकोणीय चुनाव से जोड़कर देख रहे हैं, लेकिन गणित के गुणा-भाग से अलग हटकर देखें तो यह ईवीएम में तुलसी पत्‍ता डालने जैसा ही है. बीजेपी के नाम का यह तुलसी पत्‍ता ऐसा है कि भाजपा को वोट कम मिलें फिर भी सीटें उसी की ज्‍यादा होती हैं. और तो और, सीटें कम हों फिर भी सरकार उसी की बनती है.

कांग्रेस के लिए समस्‍या यह है कि उसे इस तुलसी पत्‍ते का काट नहीं मिल रहा है. 2014 के लोकसभा चुनावों से ही उसके साथ ऐसा हो रहा है कि बीजेपी के नाम के वोट खत्‍म ही नहीं हो रहे. हम कांग्रेस नेताओं की तरह ये तो नहीं कह सकते कि ईवीएम में बटन कोई दबाओ, वोट बीजेपी को ही मिलते हैं, लेकिन पार्टी को यह सलाह जरूर दे सकते हैं कि खाने के व्‍यंजनों में तुलसी पत्‍ता डालने से पहले उसकी तैयारी की जाती है. कांग्रेस अपने लिए तुलसी पत्‍ते की व्‍यवस्‍था जरूर करे, लेकिन इससे पहले यह भी ध्‍यान रखे कि भोज की तैयारी के लिए सारे इंतजाम हो गए हैं. सभी सामग्री उचित अनुपात में पहले से मौजूद हो, फिर उसे बनाने वाले हाथ भी सुघड़ हों, तभी व्‍यंजन स्‍वादिष्‍ट भी बनेगा और तुलसी पत्‍ता डालने से उसके खत्‍म होने की आशंका भी नहीं होगी.

 

(ब्‍लॉग)

ये लेखक के निजी विचार हैं.