मुंबई। महाराष्ट्र में बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (बीएमसी) सहित अन्य निकाय चुनावों के परिणाम गुरुवार को आए। महाराष्ट्र भर के निकाय चुनावों में जहां बीजेपी को बढ़त मिली वहीं बीएमसी में शिवसेना-बीजेपी लगभग बराबरी पर रहे हैं। बीएमसी की 227 में से 226 सीटों के रुझान आए हैं जिसमें शिवसेना 84 और बीजेपी 81 पर विजयी रहे हैं। एनसीपी 7, कांग्रेस 31 और एमएनएस 7 पर जीती है। चुनाव परिणामों की अभी की स्थिति देखकर यही लग रहा है कि बीएमसी में शिवसेना को कुछ और कॉर्पोरेटर्स की जरूरत पड़ सकती है। Also Read - यूपी: बीजेपी नेता की मौत, कार में मिली गोली लगी लाश, तमंचा और शराब की बोतल भी मिली

बीएमसी में शिवसेना की जीत की खबर के साथ बीजेपी के लिए भी खुशी का बड़ा मौका आया है। पिछली बार सहयोगी शिवसेना के साथ लड़कर 31 सीटों पर जीतने वाली बीजेपी इस बार 81 पर विजयी रही है। 00बीएमसी में इन दोनों ही पार्टियों ने 25 साल पुराना गठबंधन तोड़कर अलग अलग चुनाव लड़ा था। पहले 2014 के लोकसभा चुनाव और फिर विधानसभा चुनाव में शिवसेना से ज्यादा सीटें जीतने वाली बीजेपी के हौंसले बीएमसी चुनाव को लेकर सातवें आसमान पर थे संभवतः इसीलिए उसने शिवसेना से अपना रास्ता अलग किया। Also Read - UP Panchayat Chunav: कुलदीप सेंगर की बेटी ने मां का टिकट कैंसिल होने पर भावुक वीडियो शेयर कर उठाए सवाल

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वहीं, लोकसभा और विधानसभा में बीजेपी की बढ़त के बाद से शिवसेना के बोल भी पार्टी को लेकर तीखे हो चले थे। शिवसेना के नेताओं की तरफ से लगातार बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ बयान दिए जा रहे थे। हाल में, गुजरात में पटेल आंदोलन की अगुवाई करने वाले हार्दिक पटेल को भी पार्टी ने अपने साथ जोड़ा है। मंगलवार को मतदान के दिन शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा था कि गुरुवार को चुनाव के नतीजों के बाद वह फैसला करेंगे कि राज्य स्तर पर गठबंधन को जारी रखना है या नहीं।

Shiv Sena

अब आगे क्या?: सूत्र बता रहे हैं कि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे बीएमसी की नतीजों से खुश नहीं हैं। राज्य में लंबे वक्त तक छोटे भाई की भूमिका में रही बीजेपी बीएमसी में शिवसेना की बराबरी पर आ चुकी है। एक्सपर्ट बता रहे हैं कि बीएमसी में शिवसेना को संख्या बढ़ाने के लिए बीजेपी की और विधानसभा में सरकार के लिए बीजेपी को शिवसेना की जरूरत होगी इसलिए दोनों का गठबंधन टूटना अभी संभव नहीं। हां, शिवसेना के तीखे बोल इन चुनाव परिणामों के बाद थोड़े नरम जरूर हो सकते हैं।