मुंबई: बंबई उच्च न्यायालय ने एयर इंडिया के एक पायलट की याचिका पर एयर इंडिया और नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) से जवाब मांगा है. याचिका में दावा किया गया है कि विदेश में फंसे भारतीय नागरिकों को वापस लाने में एयरलाइन कोविड-19 के संबंध में सुरक्षा कदमों का पालन नहीं कर रही है.Also Read - बाप ने 17 साल की बेटी तांत्रिक को ‘दान’ की थी, हाईकोर्ट ने कहा, बेटी को संपत्ति नहीं, जिसे दान में दिया जाए

पायलट देवेन कनानी ने अपनी याचिका में दावा किया कि भारत सरकार ने 23 मार्च 2020 को एक परिपत्र जारी कर वैश्विक महामारी के कारण विदेश में फंसे भारतीयों को वापस लाते हुए कोविड-19 को फैलने से रोकने के लिए कुछ शर्तें तय की थीं. Also Read - Air India: एयर इंडिया के यात्रियों के लिए बदल गया इन-फ्लाइट पायलट के स्वागत का अंदाज

उन्होंने याचिका में कहा कि दो यात्रियों के बीच वाली सीट खाली रखने से जुड़ी शर्त का एयर इंडिया पालन नहीं कर रही है. कनानी ने सैन फ्रांसिस्को और मुंबई के बीच चल रहे एयर इंडिया के विमान की तस्वीरें पेश की जिसमें सभी सीटें भरी हुई थीं. Also Read - स्पाइसजेट को मिली राहत, सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के आदेश पर 3 सप्ताह के लिए लगाई रोक

एयर इंडिया के वकील अभिनव चंद्रचूड़ ने याचिका का विरोध किया और उच्च न्यायालय को बताया कि 23 मार्च के परिपत्र के स्थान पर भारत सरकार ने 25 मई से घरेलू विमानों का संचालन बहाल करने की अनुमति देते हुए 22 मई 2020 को एक नया परिपत्र जारी किया.

चंद्रचूड़ ने अदालत को बताया कि नए परिपत्र में यह नहीं कहा गया है कि बीच वाली सीट को खाली रखने की आवश्यकता है. उन्होंने बताया कि विदेशों से यात्रियों को भारत लाते हुए कोविड-19 को फैलने से रोकने के लिए सभी आवश्यक एहतियाती कदम उठाए गए.

न्यायाधीश आर डी धनुका और न्यायमूर्ति अभय आहूजा की खंडपीठ ने शुक्रवार को कहा कि 22 मई के परिपत्र पर सरसरी तौर पर नजर मारने से पता चलता है कि यह केवल घरेलू विमानों के संचालन पर लागू है न कि अंतरराष्ट्रीय विमानों के संचालन पर.

पीठ ने एयर इंडिया और डीजीसीए को अपना रुख स्पष्ट करते हुए हलफनामा दायर करने के निर्देश दिए और इस मामले की अगली सुनवाई के लिए दो जून की तारीख तय की. अदालत ने साथ ही कनानी को 22 मई के परिपत्र को चुनौती देने वाली अपनी याचिका में सुधार करने की भी मंजूरी दी.