नई दिल्ली | असम के तेजपुर से लापता हुए इंडियन एयरफोर्स के लापता सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान के स्कवाड्रन लीडर डी पंकज और प्लाइट ले. एस अच्युदेव की घातक चोटों के कारण मौत हो गई. हादसे के दौरान दोनों विमान सेफ्टी डोर से निकल भी नहीं पाए थे. हादसा इतना भयानक था कि दोनों पायलटों को बचाव में कुछ करने का मौका ही नहीं मिला. तेज़पुर एयरबेस से 60 किलोमीटर की दूरी पर दुर्घटनाग्रस्त होने वाले सुखोई.30 विमान के दोनों पायलट दुर्घटना में मारे गए. वहीं इस मामले की कोर्ट ऑफ इंक्वायरी का आदेश पहले ही दिया जा चुका है.

करीब दो हफ्ते लापता हुए सुखोई.30 का ब्लैक बाक्स अरूणाचल प्रदेश में घने जंगल में मिला था. कयास लगाया जा रहा था कि हो सकता है दोनों पायलट सुरक्षित हों. लेकिन तलाशी अभियान के दौरान बचाव दलों को असम-अरुणाचल प्रदेश सीमा के पास दुर्घटनाग्रस्त हुए सुखोई-30 लड़ाकू विमान के दोनों पायलटों में से एक का खून से सना जूता, आधा जला हुआ पैन कार्ड और वालेट मिला था.

गौरतलब ही कि 23 अप्रैल को भारतीय वायुसेना का एक सुखोई-30 लड़ाकू विमान रडार से गायब हो गया था. विमान ने असम के तेजपुर एयरबेस से मंगलवार सुबह 10.30 बजे उड़ान भरी थी और 11 बजे के बाद इसका रेडियो और रडार संपर्क टूट गया. इस विमान में दो पायलट सवार थे. दोनों पायलटों की उम्र 25 से 30 वर्ष के बीच थी. विमान रूटीन ट्रेनिंग पर था.