नई दिल्ली. लोकसभा की 4 और विधानसभा की 11 सीटों पर हुए उपचुनावों में EVM की खराबी को लेकर राजनीतिक दलों ने खूब हल्ला-हंगामा मचाया. कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल समेत सभी विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए. इन उपचुनावों से पहले हुए कर्नाटक विधानसभा चुनाव और अन्य चुनावों में भी निर्वाचन आयोग की EVM पर विवाद हुआ. कहीं EVM से एक ही पार्टी को वोट देने का मामला उठा तो कहीं पर मशीन की खराबी को विपक्षी दलों ने मुद्दा बनाया. लेकिन रोचक बात यह है कि EVM की खराबी अब सिर्फ भारत में ही सिमटी नहीं रह गई है. सात समुंदर पार, विदेशों में भी भारतीय EVM पर सवाल उठने लगे हैं. जी हां, दक्षिण अफ्रीकी देश बोत्सवाना में इन दिनों चुनाव कराने के लिए भारत से भेजी गई EVM पर विवाद हो रहा है. वहां के प्रमुख राजनीतिक दल बोत्सवाना कांग्रेस पार्टी ने भी भारत की पार्टियों की तरह ही EVM के वोट एक दल के पक्ष में जाने का आरोप लगाकर कोर्ट में याचिका दायर की है. वहीं, बोत्सवाना के निर्वाचन आयोग, इंडिपेंडेंट इलेक्टोरल कमीशन ने चुनाव प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए EVM के इस्तेमाल पर जोर दिया है. Also Read - दिग्विजय सिंह ने EVM पर उठाए सवाल, कहा- चिप वाली कोई मशीन नहीं है टेंपर-प्रूफ, विकसित देश नहीं करते हैं इनका इस्तेमाल

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भारत निर्वाचन आयोग से मांगी मदद

इकोनॉमिक टाइम्स में छपी खबर के अनुसार बोत्सवाना में होने वाले चुनाव के लिए वहां के चुनाव आयोग ने भारत से EVM मंगाए थे. बोत्सवाना सरकार और वहां के निर्वाचन आयोग का तर्क था कि इससे चुनाव प्रक्रिया आसान होगी. साथ ही चुनाव तेजी से कराए जा सकेंगे. लेकिन वहां के प्रमुख विपक्षी दल बोत्सवाना कांग्रेस पार्टी (बीसीपी) ने देश में चुनाव प्रक्रिया में बदलाव को लेकर कोर्ट में याचिका दायर कर दी है. बीसीपी का आरोप है कि भारत से मंगाई गई EVM से सत्तारूढ़ बोत्सवाना डेमोक्रेटिक पार्टी (बीडीपी) के पक्ष में ही वोट जा रहे हैं. बीसीपी के आरोपों को बोत्सवाना निर्वाचन आयोग ने खारिज किया है. लेकिन कोर्ट में मामला जाने के कारण उसने भारत के चुनाव आयोग से मदद मांगी है. बोत्सवाना सरकार ने भारत निर्वाचन आयोग से कहा है कि वह अपने विशेषज्ञों को भेजे ताकि कोर्ट में EVM और VVPAT मशीनों का डेमो देकर इस विवाद को हल किया जा सके. इसके लिए बोत्सवाना से वहां के निर्वाचन आयुक्त के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल बुधवार को भारत आकर यहां के चुनाव आयोग के अधिकारियों से मिला. इसके बाद भारत से कुछ EVM बोत्सवाना कोर्ट में डेमो के लिए भेजे जाने पर विचार किया जा रहा है.

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बोत्सवाना में 6000 पोलिंग बूथों पर होने हैं चुनाव

हीरा कारोबार के लिए दुनियाभर में जाने जाने वाले बोत्सवाना में 57 संसदीय क्षेत्रों के 6 हजार पोलिंग बूथों पर चुनाव होने वाले हैं. इसके लिए ही भारत से EVM और VVPAT मशीनें मंगाई गई हैं. बोत्सवाना से आए प्रतिनिधिमंडल को भरोसा है कि यदि भारत निर्वाचन आयोग के विशेषज्ञों का दल बोत्सवाना कोर्ट में EVM और VVPAT मशीनों का डेमो दे देता है तो वहां उठा राजनीतिक विवाद शांत हो जाएगा. बोत्सवाना के प्रतिनिधिमंडल में कानून विशेषज्ञ, उसके निर्वाचन आयोग से संबंधित एक्सपर्ट आदि शामिल हैं. बोत्सवाना का चुनाव आयोग पिछले 6 महीनों से अपने देश में EVM से चुनाव कराने की तैयारी कर रहा था. चूंकि बोत्सवाना में संसदीय क्षेत्रों की संख्या ज्यादा नहीं है, इसलिए वहां के चुनाव आयोग का मानना है कि EVM से चुनाव कराना आसान होगा. इधर, भारत निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने इकोनॉमिक टाइम्स को बताया कि बोत्सवाना में निर्वाचन क्षेत्रों की कम संख्या को देखते हुए भारत से कम समय में EVM की सप्लाई की जा सकती है.

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EVM की व्यापक खराबी पर आयोग पर उठे सवाल

बीते 28 मई को लोकसभा की 4 और विधानसभा की 11 सीटों के लिए उपचुनाव हुए. आज इन उपचुनावों की मतगणना हो रही है. लेकिन चुनाव के दौरान ही मौसम की वजह से विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों की कई बूथों पर EVM के खराब होने की शिकायतें आईं. यूपी की कैराना लोकसभा सीट के लिए हुए उपचुनाव में तो इतनी तादाद में EVM खराब हुए कि कल वहां पर दोबारा से मतदान कराना पड़ा. EVM की खराबियों को लेकर समाजवादी पार्टी समेत कई राजनीतिक दलों ने चुनाव आयोग की मंशा पर सवाल उठाए. वहीं, महाराष्ट्र में शिवसेना ने भी चुनाव आयोग पर एक दल के पक्ष में काम करने का आरोप लगाया. इन आरोपों का जवाब देते हुए आयोग ने EVM की खराबी के संबंध में मीडिया में रिपोर्टों को वास्तविकता से परे बताया था.