भारतीय नौसेना ने ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल (Brahmos Missile) के नौसैन्य संस्करण का मंगलवार को सफलतापूर्वक परीक्षण किया. आधिकारिक सूत्रों ने इसकी जानकारी दी. सेना के तीनों अंगों द्वारा मिसाइल का परीक्षण किया जा रहा है. इसके तहत ब्रह्मोस मिसाइल के नौसैन्य संस्करण का परीक्षण किया गया. भारतीय नौसेना ने छह सप्ताह पहले अरब सागर में भी मिसाइल का इसी तरह का परीक्षण किया था. Also Read - Indian Navy Recruitment 2021: भारतीय नौसेना में शामिल होने का सुनहरा अवसर, बिना एग्जाम के मिलेगी नौकरी, बस करना होगा ये काम   

भारत-रूस के संयुक्त उपक्रम ब्रह्मोस एरोस्पेस ने सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों का निर्माण किया है. इन मिसाइलों को पनडुब्बी, जहाज या जमीनी प्लेटफॉर्म से छोड़ा जा सकता है. सूत्रों ने बताया कि मंगलवार को मिसाइल का परीक्षण ‘सफल’ रहा. भारतीय थल सेना ने 24 नवंबर को सतह से सतह पर मार करने में सक्षम मिसाइल का परीक्षण किया था. इसकी रफ्तार आवाज की गति से करीब तीन गुना तेज या 2.8 मैक की है. Also Read - Indian Navy Recruitment 2021: भारतीय नौसेना में इन विभिन्न पदों आवेदन करने के लिए बचे हैं चंद दिन, जल्द करें अप्लाई

मिसाइल के जमीन से छोड़े जाने वाले संस्करण की रेंज को भी 400 किलोमीटर तक बढ़ाया गया है. भारत, लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में चीन से लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास कई महत्वपूर्ण रणनीतिक स्थानों पर मूल ब्रह्मोस मिसाइलों को तैनात कर चुका है. पिछले ढाई महीने में भारत ने एंटी-रेडिएशन मिसाइल रूद्रम-एक, समेत कई मिसाइलों का परीक्षण किया है. रूद्रम-एक को सेवा में 2022 तक शामिल किए जाने की संभावना है. Also Read - Sarkari Naukri: Indian Navy Recruitment 2020-21: भारतीय नौसेना में नौकरी करने का सुनहरा मौका, इन पदों पर निकली वैकेंसी, जल्द करें आवेदन

भारतीय वायु सेना ने 30 अक्टूबर को बंगाल की खाड़ी में सुखोई लड़ाकू विमान से मिसाइल का परीक्षण किया था. वायु सेना अपनी क्षमता को बढ़ाने के लिए 40 से ज्यादा सुखोई लड़ाकू विमानों में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों को शामिल करने वाला है.

(इनपुट: भाषा)