स्वतंत्रता के मायने हम सभी जानते हैं। स्वतंत्रता ही हमें स्वाभिमान के साथ जीना सिखाती है और यही स्वतंत्रता हमें निर्भीक भी बनाती है। कवि रोबर्ट फ्रॉस्ट ने लिखा है, ‘स्वतंत्रता निर्भीक होने में निहित है।’ अर्थात जो व्यक्ति साहसी है वही पूरी तरह स्वतंत्र है। स्वतंत्र भारत के उसी साहस भरी वीरता को सिद्ध करते हैं ये बच्चे, जिन्होंने छोटी सी उम्र में अपने साहस के बल पर देश का गौरव बढ़ाया है। और, इसी साहस को सम्मानित किया गया ब्रेवरी अवार्ड यानि वीरता पुरस्कार से। जो इन बच्चों को साल २०१५ में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हाथों से प्रदान किया गया।Also Read - UP: PM मोदी 25 अक्टूबर को सिद्धार्थनगर से 7 मेडिकल कॉलेजों का उद्घाटन करेंगे, CM योगी ने दी ये जानकारी

आइये जानते हैं भारत का भविष्य कहलानेवाले इन बच्चों के बारे में, जिन्होंने अपने अपूर्व साहस से वीरता की नई मिसाल कायम कर दी। Also Read - PM मोदी पांच नवंबर को केदारनाथ जाएंगे, 250 करोड़ रुपए की केदारपुरी परियोजना शुरू करेंगे

ज़ील जीतेन्द्र मराठे: ज़ील उन शेरदिल बच्चों में से एक है, जिसने डर को परे रखकर साहस को चुना। वडोदरा की 13 साल की इस बच्ची ने उस वक्त कमाल कर दिखाया, जब उसकी स्कूल बस का एक्सीडेंट होने के कारण बस पलट गई। ज़ील ने बस का कांच तोड़कर कई बच्चों की जान बचाई। इतना ही नहीं उसने पुलिस और अम्बुलेंस को भी इस एक्सीडेंट की जानकारी दी। Also Read - PM मोदी ने विजयदशमी के मौके पर क्यों कहा- हम दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य शक्ति बनेंगे

source: thebetterindia

अंजिथ पी: केरला के रहनेवाले अंजिथ ने अपनी तैराकी के बल पर एक १२ साल के एक बच्चे की जान बचाई, जो कि २० फीट गहरी नदी में डूब रहा था। अंजिथ ने यह काम बगैर किसी डर या हिचकिचाहट के किया।

source: thebetterindia

स्वर्गीय गौरव कुमार भारती: १५ साल के गौरव कुमार ने अपनी जान की परवाह न करते हुए अपने दोस्त को डूबने से बचाया। उत्तर प्रदेश के गौरव कुमार ने गंगा नदी की लहरों के बीच जाकर अपने दोस्त की जान बचाई पर वह खुद को नहीं बचा सका। उसकी इस कुरबानी को सलाम करते हुए गौरव को वीरता पुरस्कार से नवाज़ा गया।

source: thebetterindia

रिपा दास: त्रिपुरा की ७ वर्षीया रिपा ने उस वक्त सहस दिखाया, जब उसकी माँ और बाकि घरवाले पड़ोस में लगी आग के डर से भाग रहे थे। रिपा ने उस आग में कूदकर अपनी और अपने छोटे भाई की जान बचाई। ७ साल की रिपा इसके साथ ही सबसे छोटी उम्र में वीरता पुरस्कार प्राप्त करनेवाली लड़की बनी।

source: thebetterindia

देवेश कुमार: उत्तेर प्रदेश के १६ साल के देवेश कुमार ने अपने स्कूल की प्रिंसिपल को उन चेन चोरों से बचाया, जो प्रिंसिपल के गले से चेन चुराने की कोशिश कर रहे थे। देवेश ने उनका बहादुरी से सामना किया और इस लड़ाई में उन्हें कमर में गोली भी लगी। भविष्य में देवेश भारतीय सेना का हिस्सा बनना चाहते हैं।

source: thebetterindia

इन बच्चों ने इतनी छोटी उम्र में साहस की एक नई मिसाल कायम की है। भारत के ६८ वें स्वतंत्रता दिवस पर हम इन बच्चों को सलाम करते हैं।