नई दिल्ली: भारत और चीन ने पूर्वी लद्दाख में सीमा विवाद सुलझाने के लिए मोल्डो में 14 घंटे लंबी कूटनीतिक-सैन्य वार्ता के आज मंगलवार को दोनों देशों ने संयुक्त बयान जारी कर बातचीत के जरिए मुद्दे का हल निकालने की बात कही है. भारत और चीन द्वारा जारी संयुक्त बयान में दोनों देशों ने इस बात पर भी सहमति जताई है कि अब दोनों देश फ्रंटलाइन पर और जवानों को नहीं भेजेंगे. Also Read - भारत ने Su-30MKI fighter से दागी ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, जहाज को निशाना बनाया

21 तारीख को भारत-चीन के मिलटरी कमांडर स्तर की बैठक पर दोनों पक्षों ने संयुक्त बयान जारी किया है. इसमें कहा है कि एलओसी के पास हालात ठीक करने पर हुई विस्तृत बातचीत हुई और ये आगे भी जारी रहेगी. Also Read - पाक ने पुलवामा की साजिश स्‍वीकार करके की बड़ी गलती, अब भारत उठाएगा ये कदम

कमांडर लेवल की बैठक के बाद भारत-चीन के अपने सुंयक्त बयान में कहा, “गलतफहमी से बचने, सीमा पर ज्यादा जवान नहीं भेजने, एकतरफा जमीनी कार्रवाई से हालात बदलने की कोशिश से बचने की बात के पालन पर सहमति बनी है. जल्द से जल्द कमांडर लेवल की बैठक के 7वें राउंड के आयोजन पर भी सहमति बनी.” Also Read - संन्यास लेने के बाद पाक गेंदबाज ने कहा- भारत को 2011 विश्व कप सेमीफाइनल में नहीं हरा पाने का अफसोस

भारतीय सेना ने दोनों देशों की सेनाओं के बीच हुई वार्ता के संबंध में कहा कि एलएसी पर स्थिति को स्थिर करने के मुद्दे पर दोनों पक्षों ने गहराई से विचारों का अदान-प्रदान किया. बयान में कहा गया, “दोनों पक्ष भारत और चीन के नेताओं के बीच बनी महत्वपूर्ण सहमति के ईमानदारी से क्रियान्वयन पर सहमत हुए. भारत और चीन की सेनाएं आपस में संपर्क मजबूत करने और गलतफहमी तथा गलत निर्णय से बचने पर सहमत हुईं.”

इसके अलावा दोनों पक्ष अग्रिम मोर्चे पर और अधिक सैनिक न भेजने, जमीनी स्थिति को एकतरफा ढंग से न बदलने पर सहमत हुए. भारतीय और चीनी सेना ऐसी किसी भी कार्रवाई से बचने के लिए सहमत हैं जो स्थिति को जटिल बना सकती हैं.

बता दें कि भारत और चीन ने पूर्वी लद्दाख में सीमा विवाद सुलझाने के लिए मोल्डो में 14 घंटे लंबी कूटनीतिक-सैन्य वार्ता की थी. दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल में विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधि थे. वार्ता सोमवार सुबह 9 बजे शुरू हुई और रात 11 बजे समाप्त हुई.

यह पहली बार था कि भारतीय प्रतिनिधिमंडल में दो लेफ्टिनेंट जनरल, दो मेजर जनरल और विदेश मंत्रालय (एमईए) के एक संयुक्त सचिव थे. लेह स्थित 14 कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह के नेतृत्व में, भारतीय प्रतिनिधिमंडल में दिल्ली में सेना मुख्यालय से लेफ्टिनेंट जनरल पी.जी.के. मेनन थे. मेनन नवंबर में लेह स्थित 14 कोर के कमांडर का पदभार संभालेंगे.

संयुक्त सचिव नवीन श्रीवास्तव, (पूर्वी एशिया) की उपस्थिति यह सुनिश्चित करने के लिए थी कि चीन के साथ वार्ता दोनों देशों के बीच सहमति बनी पांच-बिंदु रोडमैप पर हो, जिसमें सैनिकों को वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएससी) से फौरन पीछे हटाना भी शामिल है.

10 सितंबर को रूस के मॉस्को में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उनके चीनी समकक्ष वांग यी के बीच वार्ता के दौरान दोनों देश पांच-सूत्रीय रोडमैप पर सहमत हुए थे. प्रतिनिधिमंडल में भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के इंस्पेक्टर जनरल दीपम सेठ और चार ब्रिगेडियर भी थे. यह कोर कमांडर स्तर की चर्चा का छठा दौर था.