तिरुवनंतपुरम: केरल के इडुक्की जिले के राजामलाई में पिछले चार दिनों से भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन में अब तक 9 लोगों के शव बरामद हो चुके हैं. गुरुवार देर रात जिस जगह भूस्खलन हुआ वह मुनार के लोकप्रिय पर्यटन स्थल से लगभग 30 किमी दूर है. अधिकारियों ने बताया कि बचाव कार्य के लिए केरल पुलिस की 200 सदस्यों वाली टीम मौके पर पहुंची थी. यह खबर लिखे जाने तक आठ शव बरामद हो चुके थे और 12 व्यक्तियों को बचाया जा चुका था. Also Read - कृषि विधेयकों पर चर्चा के दंरौन हंगामा, राजनाथ सिंह बोले- आज राज्यसभा में जो हुआ वो दुखद व शर्मनाक था

इसी जिले के निवासी राज्य के ऊर्जा मंत्री एम.एम. मणि ने कहा, “भूस्खलन ऐसी जगह पर हुआ था, जहां चाय के मजदूर रहते हैं. यह स्थान एक पहाड़ी के शीर्ष पर है. स्थानीय विधायक भी मौके पर जा रहे हैं. सभी आपातकालीन सेवाओं को वहां लगा दिया गया है.” अधिकारियों ने बताया कि लगातार बारिश के कारण बिजली की लाइन प्रभावित होने से इलाके में संचार सेवाएं बाधित हैं. Also Read - केरल, पश्चिम बंगाल से अरेस्‍ट अलकायदा आतंकियों का ये था प्‍लान, पाक हैंडलर से मिल रहे थे आदेश

इस घटना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुख जाताया है. प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर कहा, “राजामलाई, इडुक्की में भूस्खलन के कारण जानमाल के नुकसान से आहत हूं. दु:ख की इस घड़ी में, मेरी संवेदनाएं शोक संतप्त परिवारों के साथ हैं. घायलों के जल्द ठीक होने की कामना करता हूं. एनडीआरएफ और प्रशासन जमीन पर काम कर रहे हैं, जिससे प्रभावितों को सहायता मिल रही है.” Also Read - दिल्ली को दहलाने की साजिश नाकाम, NIA ने पश्चिम बंगाल और केरल से अल-कायदा के 9 आतंकियों को किया गिरफ्तार

पीएम के ट्वीट के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय ने ट्वीट कर जानकारी दी कि मृतकों के परिवारों को 2 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा. पीएम राहत कोष से मृतकों के परिजनों को दो लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये दिए जाएंगे.

भारत मौसम विज्ञान विभाग ने इलाके में ‘रेड अलर्ट’ भी घोषित कर दिया है. इस इलाके में रहने वाली महिलाएं जहां चाय के बागानों में काम करती हैं, वहीं अधिकांश पुरुष जीप चालकों के रूप में काम करते हैं. गुरुवार देर रात दो निवासियों ने फॉरेस्ट स्टेशन में जाकर हादसे की सूचना दी तब जाकर अधिकारियों को इस बारे में पता चला.

इस बीच, क्षेत्र के निवासी पार्थसारथी ने मीडिया को बताया कि उन्हें करीब 80 श्रमिकों और उनके परिवारों द्वारा बसाई गई तीन लाइनों के बारे में पता था. लेकिन वह ये नहीं जानते कि जब भूस्खलन हुआ था तब वहां कितने लोग थे. क्योंकि पिछले कुछ दिनों से भारी बारिश के कारण कई श्रमिक अपने घरों पर थे. मुनार के एक अस्पताल में भर्ती दीपन ने कहा कि भूस्खलन के बाद से उन्हें उनके पिता, पत्नी और भाई के परिवार के बारे में कोई जानकारी नहीं है. वहीं उनकी मां को गंभीर हालत में कोट्टायम मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया था.

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केरल के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा है कि एक मोबाइल मेडिकल टीम और 15 ऐंबुलेंस को घटना स्थल पर भेजा गया है. राजमाला में भूस्खलन पीड़ितों को बचाने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल तैनात किया गया है. पुलिस, अग्नि, वन और राजस्व अधिकारियों को भी बचाव अभियान तेज करने का निर्देश दिए गए हैं.

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दुख से व्याकुल दीपन ने बताया, “पिछले 10 दिनों से लगातार बारिश हो रही है. गुरुवार रात 10.30 बजे के आसपास भूस्खलन हुआ. मुझे मेरे पिता, पत्नी और मेरे भाई के परिवार के बारे में कुछ नहीं पता. इस क्लस्टर में तीन पंक्तियों में बने घरों में लगभग 80 लोग रहते हैं. पता नहीं उन सबका क्या हुआ. भूस्खलन में 30 जीपें भी दब गईं हैं.” केरल सरकार ने घटनास्थल पर हवाई बचाव दल लाने का प्रयास किया, लेकिन खराब मौसम के कारण यह प्रयास नाकाम रहा. हालांकि, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल की दो टीमें मौके पर पहुंचने वाली थीं .

अधिकारियों ने कहा कि यहां सबसे बड़ी समस्या यह है कि इस क्षेत्र की सभी संचार लाइनें टूट गई हैं और जगह-जगह पेड़ों के उखड़ने के कारण सड़कें अवरुद्ध हो गई हैं.