नई दिल्ली: निर्भया गैंगरेप और हत्या के मामले (Nirbhaya Gangrape and Murder Case) में दोषी पाए जाने वाले अक्षय सिंह की पुनर्विचार याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सुनवाई की. सुप्रीम कोर्ट ने दोषी अक्षय सिंह की याचिका पर दलीलें सुनने के बाद फांसी की सजा पर रोक लगाने से इंकार कर दिया है. इस मामले के दोषी अक्षय सिंह सहित चारों दोषियों की फांसी की सजा का रास्ता साफ़ हो गया है. अब ये तय होना है कि फांसी किस दिन होगी. सुप्रीम कोर्ट ने ही चारों को दोषी पाते हुए फांसी की सजा सुनाई थी. इस पर एक दोषी अक्षय सिंह ने पुनर्विचार याचिका दायर की थी. हालांकि दोषियों के पास एक और मौका है. वह क्यूरेटिव पिटीशन दायर कर सकते हैं. इसके अलावा दोषियों द्वारा राष्ट्रपति के पास दया याचिका भी दायर कर सकते हैं. इसके लिए दोषियों के पास दिन का समय होगा. इसी बीच दोषियों को फांसी देने  आज ही तय की जा सकती है. जस्टिस आर बनुमथी, एएस बोपन्ना और अशोक भूषण की एक नई तीन-न्यायाधीश पीठ ने इस मामले की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई की. भारत के मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे ने खुद को अलग कर लिया था क्योंकि उनका भतीजा एक बार निर्भया मामले से संबंधित एक सुनवाई में पेश हुआ था.

आज इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. दोषी अक्षय सिंह के वकील ओपी सिंह ने कई दलीलें दीं. वकील ओपी सिंह का कहना था कि मामले को राजनैतिक रूप से प्रभावित किया गया. अभी पिछले कई ऐसे मामलों के आरोपियों को सजा नहीं हुई है. फांसी की सजा भारतीय संस्कृति और मावधिकारों के ख़िलाफ़ है. दोषी के वकील ने ये भी कहा कि एक अन्य दोषी राम सिंह की जेल में हुई मौत की जांच क्यों नहीं हुई. वहीं, इस जवाब में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब इन बातों का क्या महत्व है.

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इस मामले में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि दोषियों का गुनाह माफ़ी के लायक नहीं है. इसे तो भगवान भी माफ़ नहीं कर सकते हैं. दोषी का अपराध बेहद गंभीर है. अक्षय कुमार द्वारा दायर की गई पुनर्विचार याचिका में सुप्रीम कोर्ट से अपने 2017 के फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा था, जिसमें उसने गैंगरेप और हत्या मामले में अक्षय को दोषी पाया था. सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया गैंगरेप और हत्या के मामले में सभी चार आरोपियों को मौत की सजा सुनाई थी.