नई दिल्ली: दिल्ली में कोरोना वायरस से कैसे लड़ा जाए, इसे लेकर अपनाई जा रही रणनीतियों को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और दिल्ली के सीएम अरविन्द केजरीवाल आमने-सामने आ गए हैं. अरविन्द केजरीवाल ने गृह मंत्रालय के उस फैसले का विरोध किया है, जिसमें कोरोना मरीजों को क्लिनिकल निरीक्षण के लिए 15 दिन के लिए कोविड केन्द्रों पर ले जाने के लिए कहा गया है. अरविन्द केजरीवाल ने कहा कि अगर प्रशासन क्लिनिकल निरीक्षण के लिए मरीजों को जबरदस्ती कोविड केन्द्रों में ले जाता है तो यह 15 दिन की हिरासत जैसा होगा. Also Read - Corona Virus: मध्य प्रदेश के इस इलाके पर टूटा कोरोना का कहर, अनिश्चितकाल के लिए लगा लॉकडाउन

सीएम केजरीवाल ने कहा कि क्लिनिकल निरीक्षण/समीक्षा के लिए कोविड-19 के प्रत्येक मरीज का सरकारी अस्पताल जाना अनिवार्य करने वाला केन्द्र का आदेश सही नहीं है. केजरीवाल ने कहा कि मैं केन्द्र से अनुरोध करता हूं कि वह कोविड-19 के प्रत्येक मरीज की जांच सरकारी अस्पताल में कराने की अनिवार्यता का नया आदेश वापस ले. Also Read - फिल्‍मों की शूटिंग के लिए SOP लेकर आने वाली है सरकार: केंद्रीय मंत्री जावड़ेकर

अरविन्द केजरीवाल ने कहा कि केंद्र सरकार को ये आदेश वापस लेना चाहिए. अरविन्द केजरीवाल के साथ ही मनीष सिसोदिया ने भी इस फैसले का विरोध किया है. उन्होंने कहा कि होम आइसोलेशन के जो भी नियम बदले गए हैं, उससे लोगों में डर का माहौल हो गया है. इसलिए इन नियमों को वापस लिया जाना चाहिए. सिसोदिया ने ये भी कहा कि दिल्ली में कोरोना वायरस से लड़ने के लिए दो मॉडल हैं, एक मॉडल अमित शाह का है, जबकि दूसरा मॉडल अरविन्द केजरीवाल का है. बता दें कि दिल्ली में कोरोना मरीजों की संख्या 70 हज़ार पार कर दी गई है. Also Read - ज्योतिरादित्य सिंधिया के निजी सहायक कोरोना संक्रमित, ग्वालियर में चल रहा इलाज