नई दिल्ली: राज्यसभा में कृषि संबंधी दो विधेयकों को पारित किये जाने के दौरान विपक्षी सदस्यों के “अमर्यादित आचरण” को लेकर केंद्र सरकार के वरिष्ठ नेताओं ने रविवार को उनकी आलोचना करते हुए इसे “शर्मनाक” और संसदीय इतिहास में अभूतपूर्व करार दिया. केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, प्रकाश जावड़ेकर, प्रह्लाद जोशी, पीयूष गोयल, थावरचंद गहलोत और मुख्तार अब्बास नकवी ने विपक्षी सदस्यों पर निशाना साधने के लिये यहां एक संवाददाता सम्मेलन किया. सिंह ने कहा कि स्वस्थ लोकतंत्र में ऐसे आचरण की उम्मीद नहीं की जाती. Also Read - India China Bilateral Issue: सीमा विवाद पर बोले रक्षा मंत्री- देश की रक्षा के लिए भारतीय सैनिक दृढ़ता से सीमा पर डटे हैं

राज्यसभा में रविवार को विपक्ष के हंगामे के बीच कृषि विधेयक ध्वनिमत से पारित हुए. हालांकि इस दौरान सदन में जोरदार हंगामा हुआ. इस पूरे मामले पर विपक्ष ने जहां सरकार पर लोकतंत्र की हत्या का आरोप लगाया तो वहीं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अन्य केंद्रीय मंत्रियों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विपक्ष पर जोरदार हमला बोला. Also Read - UP Rajya Sabha: भाजपा के 8 प्रत्याशियों ने राज्यसभा के लिए भरा नामांकन, योगी आदित्यनाथ भी थे मौजूद

उन्होंने कहा, “आज राज्यसभा में कृषि से संबंधित 2 विधेयकों पर चर्चा चल रही थी उस समय राज्यसभा में जो हुआ वो जहां दुखद था, वहीं दुर्भाग्यपूर्ण था और उससे भी आगे जाकर मैं कहना चाहूंगा कि वो अत्यधिक शर्मनाक था.” रक्षा मंत्री ने कहा कि राज्यसभा उपसभापति के साथ जो दुर्व्यवहार हुआ, सारे देश ने प्रत्यक्ष रूप से देखा है. जहां तक मैं जानता हूं ऐसी घटना आज तक न लोकसभा में हुई है न राज्यसभा में हुई है. संसदीय परंपराओं में विश्वास रखने वाला कोई भी व्यक्ति इस प्रकार की घटना से आहत होगा. Also Read - भाजपा ने जारी की राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची, यूपी से हरदीप सिंह पुरी, अरूण सिंह उम्मीदवार

सिंह ने कहा कि विपक्षी सदस्यों ने नियम पुस्तिका फाड़ दी, आसन पर मौजूद राज्य सभा के उप सभापति हरिवंश की डेस्क पर कागज फेंके और आधिकारियों की टेबल पर चढ़ गए. उन्होंने कहा कि ऐसा उन्होंने पहले कभी नहीं देखा. हरिवंश की मूल्यों में आस्था रखने वाले व्यक्ति के तौर पर प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि विपक्षी सदस्यों का उनके प्रति “दुर्व्यवहार” अभूतपूर्व था. उन्होंने पूछा, अगर विपक्ष सहमत नहीं भी था तो क्या यह उन्हें “हिंसक” होने, आसन पर हमला करने की अनुमति देता है?

राजनाथ सिंह ने कहा, “ये दोनों विधेयक किसान और कृषि जगत के लिए ऐतिहासिक हैं. इससे किसानों की आय बढ़ेगी. परन्तु किसानों के बीच गलतफहमी पैदा की जा रही है कि MSP खत्म कर दी जाएगी जबकि ऐसा नहीं है किसी भी सूरत में MSP समाप्त नहीं होगा.”

कृषि विधेयक के विरोध में भाजपा के सहयोगी शिरोमणि अकाली दल द्वारा मोदी सरकार छोड़ने के फैसले के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि कुछ फैसलों के पीछे “राजनीतिक कारण” होते हैं. उन्होंने कहा, “मैं किसानों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि न्यूनतम समर्थन मूल्य और एपीएमसी जारी रहेंगे. यह किसी भी कीमत पर कभी नहीं हटाए जाएंगे.”

गतिरोध की वजह से कुछ देर के लिये ऊपरी सदन की कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा . हालांकि वहां ध्वनि मत से कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्द्धन और सरलीकरण) विधेयक-2020 और कृषक (सशक्तीकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन समझौता और कृषि सेवा पर करार विधेयक-2020 को पारित कर दिया गया. लोकसभा में ये विधेयक पहले ही पारित हो चुके हैं और अब इन्हें राष्ट्रपति की मंजूरी के लिये भेजा जाएगा.

(इनपुट भाषा)