Rajya Sabha Election 2020: राज्यसभा की चार सीटों के लिये कर्नाटक से पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे सहित सभी चारों उम्मीदवार निर्विरोध चुन लिए गए गए हैं. कर्नाटक विधानसभा के सचिव एवं निर्वाचन अधिकारी एम. के. विशालक्षी ने जद (एस) से देवेगौड़ा, कांग्रेस से खड़गे और भाजपा के एरन्ना कडाडी तथा अशोक गस्ती के नामांकन पत्रों की जांच के बाद इन्हें (नामांकन पत्रों को) बुधवार को वैध घोषित किया था. वहीं निर्दलीय उम्मीदवार संगमेश चिक्कनारागुंडा का नामांकन पत्र जांच के दौरान खारिज कर दिया गया था. नाम वापस लेने की आखिरी तिथि 12 जून यानी आज थी. Also Read - गलवान घाटी झड़प में घायल हुए जवानों से मिले पीएम मोदी, बोले- आपको जन्म देने वाली माताओं को नमन करता हूं

गौरतलब है कि राज्यसभा की चार सीटों के लिये कर्नाटक में 19 जून को चुनाव होने का कार्यक्रम है. ये चारों सीटें 25 जून को रिक्त हो रही हैं, जिनका प्रतिनिधित्व अभी कांग्रेस के राजीव गौड़ा और बी के हरिप्रसाद, भाजपा के प्रभाकर कोरे और जद (एस) के डी कुपेंद्र रेड्डी कर रहे हैं. Also Read - यूरोपीय संघ और अमेरिका के बाद अब ब्रिटेन ने भी लगाया पाकिस्तान एयरलाइंस पर बैन, नहीं भर सकेगी उड़ानें

विधानसभा में स्पीकर सहित भाजपा के 117 सदस्य हैं. भगवा पार्टी चार में दो सीटों पर आसानी से जीत हासिल करने की स्थिति में थी. अब कर्नाटक से भाजपा के एरन्ना कडाडी और अशोक गस्ती राज्यसभा सांसद होंगे. वहीं
कांग्रेस के 68 विधायक हैं और यह एक सीट पर ही जीत सुनिश्चित कर सकती थी. जद (एस) के विधानसभा में 34 सदस्य हैं और वह अपने बूते राज्यसभा की एक सीट जीत पाने की स्थिति में नहीं थी, लेकिन अपने अतिरिक्त वोटों से कांग्रेस का उसे समर्थन प्राप्त हुआ. किसी भी उम्मीदवार को जीतने के लिये कम से कम 45 वोटों की जरूरत थी. Also Read - ममता बनर्जी का बड़ा ऐलान, पश्चिम बंगाल में जून 2021 तक दिया जाएगा गरीबों को मुफ्त राशन

हालांकि, इस चुनाव में मतदान की जरूरत नहीं पड़ी क्योंकि किसी भी पार्टी ने एक दूसरे के खिलाफ अतिरिक्त उम्मीदवार नहीं उतारे थे और खुद को उतनी ही सीटों तक सीमित रखा, जिन पर वे जीत हासिल कर सकते थे. खड़गे, इस चुनाव में निर्वाचित घोषित होने पर राज्यसभा के पहली बार सदस्य बने. अपने चार दशक से अधिक लंबे राजनीतिक जीवन में वह जनता द्वारा हमेशा प्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित होते रहे हैं.

राज्यसभा में देवेगौड़ा का यह दूसरा कार्यकाल होगा. वह 1996 में प्रधानमंत्री चुने जाने के बाद पहली बार राज्यसभा के सदस्य बने थे.