नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को कहा कि नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन (NRC) और नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (NPR) के बीच कोई संबंध नहीं है. समाचार ऐजेंसी को दिए एक इंटरव्यू में अमित शाह ने कहा, “मैं आज यह स्पष्ट रूप से कहता हूं कि नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन (NRC) और नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (NPR) के बीच कोई संबंध नहीं है.” शाह ने आगे कहा, “इस (अखिल भारतीय NRC) पर बहस करने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि अभी इस पर कोई चर्चा नहीं हुई है, पीएम मोदी सही थे, इस पर अभी तक कैबिनेट या संसद में कोई चर्चा नहीं हुई है.”

शाह ने कहा, “एनपीआर के लिए कोई दस्तावेज नहीं मांगा जाएगा, किसी के पास आधार है तो नंबर देने में हर्ज क्या है? हमने एक ऐप बनाया है, जिस पर लोग जानकारी भेज सकते हैं. NPR का काम राज्य सरकार के कर्मचारी ही करेंगे, दुरुपयोग नहीं होगा. कुछ चीजें एनपीआर में नई हैं इनके आधार पर योजनाओं का खाका बनता है, अगर कोई इसका विरोध करता है तो वह गरीबों का विरोध कर रहा है.”

नागरिकता कानून को लेकर विरोध प्रदर्शनों पर अमित शाह ने कहा कि “नागरिकता कानून को लेकर सबसे ज्यादा उत्तर पूर्वी और बंगाल में विरोध की उम्मीद थी, लेकिन वहां तुलनात्मक रूप से शांति रही. बाकी जगहों पर राजनीतिक आंदोलन चलाया गया.” नागरिकता संशोधन कानून पर सरकार की तरफ से संवाद में कमी पर गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, “हमारी तरफ से कुछ तो कमी रही होगी, मुझे यह स्वीकार करने में कोई समस्या नहीं है. मगर संसद में मेरा भाषण देख लीजिए, उसमें मैंने सब स्पष्ट कर दिया था कि नागरिकता जाने का कोई सवाल नहीं है.”

असदुद्दीन ओवैसी द्वारा नागरिकता संशोधन कानून की आलोचना पर अमित शाह ने एएनआई को कहा: अगर हम कहें कि सूर्य पूर्व से उगता है तो ओवैसी जी कहेंगे कि सूर्य पश्चिम से उगता है. फिर भी मैं उन्हें फिर से विश्वास दिलाता हूं कि नागरिकता संशोधन कानून का NRC से कोई लेना-देना नहीं है.

केरल और पश्चिम बंगाल ने केरल एनपीआर के लिए ना कहा है इस पर अमित शाह ने कहा, “मैं विनम्रतापूर्वक दोनों मुख्यमंत्रियों से फिर से अपील करता हूं कि ऐसा कोई कदम न उठाएं और कृपया आप अपने फैसलों की समीक्षा करें, गरीबों को सिर्फ अपनी राजनीति के लिए विकास कार्यक्रमों से बाहर न रखें.”

डिटेंशन सेंटर को लेकर अमित शाह ने कहा कि देश में केवल एक डिटेंशन सेंटर असम में चल रहा है,. उन्होंने कहा, “एक डिटेंशन सेंटर असम में चल रहा है, उसमें केवल अवैध प्रवासियों को रखा जाता है. कहीं और डिटेंशन सेंटर की जानकारी नहीं.”

गृह मंत्री ने कहा कि असम का डिटेंशन सेंटर एक निंरतर चलने वाली प्रक्रिया के तहत बना है. ये डिटेंशन सेंटर और एनआरसी का कोई लेनदेन नहीं है. उन्होंने स्पष्ट कहा कि असम में एक डिटेंशन सेंटर सालों पहले बना जिसे मोदी सरकार ने नहीं बनाया था. उन्होंने ये भी कहा कि पूरे देश में एक भी डिटेंशन सेंटर नहीं बनाया जा रहा है.

गृह मंत्री ने डिटेंशन सेंटर को लेकर चल रही तमाम अफवाहों को लेकर कहा, ‘डिटेंशन सेंटर का एनआरसी से कोई लेनादेना नहीं है. सीएए से तो इसका दूर-दूर का वास्ता नहीं है. सीएए में शरणार्थी को नागरिकता देने का प्रावधान है, लेने का नहीं तो फिर इसके तहत कोई शरणार्थी को अवैध ठहराया ही नहीं जा सकता है.” उन्होंने कहा कि सीएए जब किसी को घुसपैठिया नहीं ठहराता है तो इसकी वजह से किसी को डिटेंशन सेंटर में रखने का सवाल ही कहां उठता है.