नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को जामिया मिलिया इस्लामिया की छात्रा सफूरा जरगर को जमानत दे दी है. दिल्ली हिंसा से जुड़े मामले में सफूरा को अप्रैल में गिरफ्तार किया गया था. नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) को लेकर फरवरी में उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुई सांप्रदायिक हिंसा के आरोप में गैर कानूनी गतिविधियां निरोधक अधिनियम (यूएपीए) के तहत सफूरा को गिरफ्तार किया गया था.Also Read - UP Election 2022: हम अकेले सभी 403 सीटों पर चुनाव लड़ेगे AAP के यूपी प्रभारी Sanjay Singh का बड़ा बयान; Exclusive Interview

सफूरा जरगर गर्भवती हैं और अदालत ने उन्हें उन्हें मानवीय आधार पर जमानत दी है. सफूरा गर्भवर्ती हैं और संशोधित नगारिकता कानून (सीएए) के विरोध के दौरान उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए सांप्रदायिक हिंसा के मामले में उन्हें गैर कानूनी गतिविधियां निरोधक अधिनियम (यूएपीए) के तहत गिरफ्तार किया गया था. Also Read - कश्मीर में सुरक्षाबलों के हाथ लगी बड़ी कामयाबी, जैश ए मोहम्मद के 6 आतंकियों को सेना ने किया ढेर

हालांकि, सफूरा की जमानत का सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मानवीय आधार पर विरोध नहीं किया. अदालत में सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस का पक्ष रखते हुए मेहता ने कहा कि सफूरा को मानवीय आधार पर नियमित जमानत दी जा सकती है और फैसला मामले के तथ्यों के आधार पर नहीं लिया जाना चाहिए और न ही इसे नजीर बनानी चाहिए. Also Read - Srinagar Terrorist Attack UPDATE: आतंकी हमले में घायल 14 पुलिसकर्मियों में से एक ASI और एक कॉन्‍स्‍टेबल शहीद

न्यायमूर्ति राजीव शकधर ने वीडियो कांफ्रेंस के जरिये हुई सुनवाई करते हुए 23 हफ्ते से गर्भवती सफूरा को 10 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की जमानत पेश करने पर रिहा करने का आदेश दिया. अदालत ने कहा कि सफूरा मामले से जुड़ी किसी भी गतिविधि में शामिल नहीं होंगी और न ही जांच या गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश करेंगी.