नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को जामिया मिलिया इस्लामिया की छात्रा सफूरा जरगर को जमानत दे दी है. दिल्ली हिंसा से जुड़े मामले में सफूरा को अप्रैल में गिरफ्तार किया गया था. नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) को लेकर फरवरी में उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुई सांप्रदायिक हिंसा के आरोप में गैर कानूनी गतिविधियां निरोधक अधिनियम (यूएपीए) के तहत सफूरा को गिरफ्तार किया गया था. Also Read - गलवान घाटी झड़प में घायल हुए जवानों से मिले पीएम मोदी, बोले- आपको जन्म देने वाली माताओं को नमन करता हूं

सफूरा जरगर गर्भवती हैं और अदालत ने उन्हें उन्हें मानवीय आधार पर जमानत दी है. सफूरा गर्भवर्ती हैं और संशोधित नगारिकता कानून (सीएए) के विरोध के दौरान उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए सांप्रदायिक हिंसा के मामले में उन्हें गैर कानूनी गतिविधियां निरोधक अधिनियम (यूएपीए) के तहत गिरफ्तार किया गया था. Also Read - यूरोपीय संघ और अमेरिका के बाद अब ब्रिटेन ने भी लगाया पाकिस्तान एयरलाइंस पर बैन, नहीं भर सकेगी उड़ानें

हालांकि, सफूरा की जमानत का सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मानवीय आधार पर विरोध नहीं किया. अदालत में सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस का पक्ष रखते हुए मेहता ने कहा कि सफूरा को मानवीय आधार पर नियमित जमानत दी जा सकती है और फैसला मामले के तथ्यों के आधार पर नहीं लिया जाना चाहिए और न ही इसे नजीर बनानी चाहिए. Also Read - ममता बनर्जी का बड़ा ऐलान, पश्चिम बंगाल में जून 2021 तक दिया जाएगा गरीबों को मुफ्त राशन

न्यायमूर्ति राजीव शकधर ने वीडियो कांफ्रेंस के जरिये हुई सुनवाई करते हुए 23 हफ्ते से गर्भवती सफूरा को 10 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की जमानत पेश करने पर रिहा करने का आदेश दिया. अदालत ने कहा कि सफूरा मामले से जुड़ी किसी भी गतिविधि में शामिल नहीं होंगी और न ही जांच या गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश करेंगी.