नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद सुरक्षा कारणों से इंटरनेट पर लगाई गई पाबंदी को लेकर बड़ा फैसला दिया है. शीर्ष अदालत ने कहा कि इंटरनेट अभिव्यक्ति की आजादी का जरिया है और इस पर पाबंदी लगाना ठीक नहीं है. इस मामले की सुनवाई करते हुए तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि सरकारें सुरक्षा कारणों का हवाला देकर इंटरनेट पर पाबंदी नहीं लगा सकती. Also Read - अमित शाह ने चुनावी रैली में कहा- सरकार आई तो पुडुचेरी को बनाएंगे भारत का 'गहना', एक बार मौका तो मिले

पीठ ने कहा कि कश्मीर ने बीते कई दशकों में काफी हिंसा देखी है और हम अपनी तरह से यह कोशिश करेंगे कि मानवाधिकारों और सुरक्षा के मुद्दों के साथ आजादी के बीच संतुलन कायम रहे. जस्टिस एनवी रमना ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19 में शामिल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में इंटरनेट का अधिकार शामिल है. तीन सदस्यीय पीठ की ओर से जस्टिस रमना ने फैसला पढ़ा. Also Read - West Bengal Assembly Elections 2021 Opinion Poll: बंगाल में फिर एक बार ममता सरकार! लेकिन 3 से 100 पर पहुंच सकती है भाजपा; जानिए क्या है जनता का मूड

कोर्ट ने मामले पर फैसला सुनाते हुए कहा कि सभी पाबंदियों पर एक हफ्ते में फिर समीक्षा हो. साथ ही कोर्ट ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति धारा 144 से प्रभावित होता है तो वह इसे चुनौती दे सकता है. कोर्ट ने आदेश दिया कि राज्य व केंद्र सरकार इंटरनेट पाबंदियों पर एक बार फिर समीक्षा करे. साथ ही जानकारियों को सार्वजनिक किया जाए. न्यायधीश ने कहा कि जानकारी को पब्लिक डोमेन में डाले ताकि लोग कोर्ट जा सके. सरकार धारा 144 लगाने को सार्वजनिक करे. Also Read - बीजेपी ने काउंटर नारे से ममता बनर्जी पर साधा निशाना, कहा- बंगाल को अपनी बेटी चाहिए, बुआ नहीं