नई दिल्ली: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने जम्मू-कश्मीर पुलिस के पूर्व DSP दविंदर सिंह के खिलाफ एक आतंकी मामले में आरोप पत्र दायर किया है. इस आरोप पत्र में दविंदर सिंह के अलावा छह अन्य व्यक्तियों का नाम भी शामिल है. इससे पहले खबरें आईं थीं कि 26 जून को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने बर्खास्त उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) दविंदर सिंह की कथित सांठगांठ की जांच पूरी कर ली है. जिसके बाद सोमवार को राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने एक आतंकी मामले में हिज्बुल मुजाहिदीन के आतंकवादी सैयद नावेद और जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीएसपी दविंदर सिंह सहित छह लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया है. Also Read - लोग क्यों नहीं देखना चाहते महेश भट्ट-संजय दत्त की फिल्म सड़क 2? तस्वीरों में देखिए ट्रेलर

राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने पाकिस्तान स्थित आतकंवादियों और दिल्ली में पाकिस्तानी उच्चायोग के सदस्यों की मदद से कथित रूप से ‘भारत के खिलाफ युद्ध’ छेड़ने के लिये जम्मू-कश्मीर के निलंबित पुलिस उपाधीक्षक देविंदर सिंह और हिज्बुल मुजाहिदीन के शीर्ष कमांडर समेत छह लोगों के खिलाफ सोमवार को आरोप पत्र दायर किया है. Also Read - गुजरात में कोविड-19 अस्पताल में लगी आग, मरीजों को शिफ्ट किया गया

राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने पाकिस्तान स्थित आतकंवादियों और दिल्ली में पाकिस्तानी उच्चायोग के सदस्यों की मदद से कथित रूप से ‘भारत के खिलाफ युद्ध’ छेड़ने के लिये जम्मू-कश्मीर के निलंबित पुलिस उपाधीक्षक देविंदर सिंह और हिज्बुल मुजाहिदीन के शीर्ष कमांडर समेत छह लोगों के खिलाफ सोमवार को आरोप पत्र दायर किया. यदि अदालत में सभी आरोप सही साबित हुए तो आरोपियों को मृत्युदंड अथवा आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा सकती है. Also Read - Independence Day 2020: 15 अगस्त को भारत रचेगा इतिहास,अमेरिका के टाइम्स स्क्वायर पर लहराएगा तिरंगा

इसके अलावा आरोप पत्र में नवीद बाबू के भाई सैयद इरफान अहमद, समूह के कथित भूमिगत कार्यकर्ता इरफान शफी मीर, उसके कथित साथी अहमद राठेर और नियंत्रण रेखा व्यापार संघ के पूर्व अध्यक्ष कारोबारी तनवीर अहमद वानी को भी नामजद किया गया है. राष्ट्रीय जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपी ‘हिंसक गतिविधियों को अंजाम देने और भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने’ की पाकिस्तान स्थित हिज्बुल मुजाहीदीन और पाकिस्तानी सरकारी एजेंसियों की गहरी साजिश का हिस्सा थे.

एनआईए ने षड़यंत्र की विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि यहां जेल में बंद पुलिस उपाधीक्षक सिंह मीडिया प्लेटफॉर्मों के जरिये नयी दिल्ली में स्थित पाकिस्तान उच्चायोग के कुछ अधिकारियों के साथ संपर्क में था. जांच में पता चला है कि पाकिस्तानी अधिकारी उसे संवेदनशील सूचनाएं देने के लिये मना रहे थे. आरोप पत्र में कहा गया है कि मामले में जांच में पता चला है कि पाकिस्तानी प्रतिष्ठान प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन की आतंकवादी गतिविधियों के लिये सभी संभव रास्ते बनाने, वित्तीय मदद देने, हथियार मुहैया कराने जैसे काम कर रहे थे.

आरोप पत्र में कहा गया है कि प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन के प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन, उप प्रमुख आमिर खान, संचालन प्रमुख खुर्शीद महमूद और वित्त प्रमुख नजर महमूद समेत इसके ‘तथाकथित नेतृत्व’ के अलावा पाकिस्तानी प्रतिष्ठान भी जम्मू-कश्मीर स्थित समूह के कैडर को मदद पहुंचा रहे थे. अधिकारियों ने कहा कि आरोप पत्र में 3,017 मौखिक और दस्तावेजी सबूत पेश किए गए हैं.

बता दें कि जम्मू-कश्मीर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को तब झटका लगा, जब दविंदर सिंह इस साल 11 जनवरी को अपने साथी इरफान मीर और नावेद मुश्ताक के साथ श्रीनगर-जम्मू राजमार्ग के मीर बाजार इलाके में गिरफ्तार किया गया. सिंह के साथ गिरफ्तार किए गए यह दोनों व्यक्ति दो सबसे वांछित आतंकवादी हैं. उसने पुलिस अधिकारियों के साथ बहस की थी, जिन्होंने उसकी कार को रुकवाया था. उसने कहा कि वह एक ‘गुप्त ऑपरेशन’ पर जा रहा है जिसके बारे में केवल उसके वरिष्ठ ही जानते हैं.

आतंकवादियों के साथ कथित संबंधों के कारण सिंह पिछले तीन महीनों से अपने वरिष्ठों के रडार पर था. अगर सिंह के आतंकवादियों के साथ यह कथित संबंध उजागर नहीं हुए होते, तो उसे शीघ्र ही पुलिस अधीक्षक (एसपी) के पद पर पदोन्नत किए जाने की संभावना थी. चूंकि यह मामला संवेदनशील था, इसलिए इसकी जांच एनआईए को सौंप दी गई जिसने सिंह को हिरासत में ले लिया और उसे कश्मीर के बाहर स्थानांतरित कर दिया.