नई दिल्ली: निर्भया दुष्कर्म मामले (Nirbhaya Gangrape And Murder Case) में मौत की सजा पाने वाले चारों दोषियों में से एक पवन गुप्ता ने सोमवार को भारत के राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दायर की. वह एकमात्र दोषी था जिसने अब तक दया याचिका नहीं भेजी थी. एक अन्य दोषी, अक्षय ने पिछले सप्ताह एक और दया याचिका दायर की थी, जिसमें कहा गया था कि पहले वाली दया याचिका ‘अधूरी’ थी. बता दें कि इस मामले में पटियाला हाउस कोर्ट ने फांसी पर रोक लगाने से भी इनकार कर दिया है. Also Read - निर्भया के पिता ने राहुल गांधी को बताया फरिश्ता... आखिर क्यों?

तीन मार्च को सुबह 6 बजे चारों दोषियों -अक्षय सिंह, पवन गुप्ता, विनय कुमार शर्मा और मुकेश कुमार को फांसी दी जानी है. मामला दिसंबर 2012 में राष्ट्रीय राजधानी में एक 23 वर्षीय लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म और हत्या से संबंधित है, जिसे बाद में निर्भया नाम दिया गया. इस मामले में एक किशोर सहित छह लोगों को आरोपी बनाया गया था. छठे आरोपी राम सिंह ने मामले में मुकदमा शुरू होने के बाद तिहाड़ जेल में कथित रूप से आत्महत्या कर ली. किशोर को 2015 में सुधारगृह में तीन साल बिताने के बाद रिहा कर दिया गया था. Also Read - निर्भया को इंसाफ दिलाकर सोशल मीडिया पर रोल मॉडल बनी वकील सीमा कुशवाहा, 7 साल में नहीं लिया एक भी पैसा

निर्भया मामले में पटियाला हाउस कोर्ट ने 3 मार्च को दोषियों को फांसी देने का वारंट जारी किया है. वहीं, इससे पहले आज सुप्रीम कोर्ट में दोषी पवन गुप्ता की क्यूरेटिव पिटीशन पर सुनवाई हो गई है. कोर्ट ने इस पिटीशन को भी खारिज कर दिया है. बंद कमरे में सुनवाई की गई. सुनवाई न्यायमूर्ति एन वी रमण, न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा, न्यायमूर्ति आर एफ नरीमन, न्यायमूर्ति आर भानुमति और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ न्यायमूर्ति रमण के चैंबर में की. दक्षिणी दिल्ली में 16 दिसंबर 2012 को चलती बस में एक छात्रा से सामूहिक बलात्कार की घटना हुई थी और दोषियों ने बर्बरता करने के बाद उसे बस से फेंक दिया था. एक पखवाड़े बाद उसकी मौत हो गई. Also Read - निर्भया मामला: फांसी से कुछ घंटे पहले दोषियों का नया पैंतरा, उच्च न्यायालय का किया रुख