नई दिल्ली: विवादित संशोधित नागरिकता कानून के विरोध में प्रदर्शन कर रहे जामिया मिल्लिया इस्लामिया और देश के अन्य विश्वविद्यालयों के छात्रों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के नेतृत्व में पार्टी नेता सोमवार को यहां इंडिया गेट पर धरने पर बैठ गए और आरोप लगाया कि इस संशोधित कानून की मंशा संविधान को तबाह करना है. शाम चार से छह बजे तक चले ‘मूक प्रदर्शन’ के बाद, कांग्रेस महासचिव ने नागरिकता कानून को लेकर मोदी सरकार पर प्रहार करते हुए कहा कि रविवार को जामिया मिल्लिया इस्लामिया के विद्यार्थियों पर पुलिस की कार्रवाई ‘भारत की आत्मा पर हमला’ है. उन्होंने कहा, ‘‘जब सरकार इस तरह से विश्वविद्यालय के अंदर घुसकर छात्रों पर वार करती है तो पूरे देश को चोट पहुंचती है. मैं मां हूं, ये बच्चे मेरे बच्चों की उम्र के हैं.’’

उन्होंने कहा कि संशोधित नागरिकता कानून भारत के संविधान के खिलाफ है और यह संविधान को ‘तबाह’ करने के लिए लाया गया है. कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘ भाजपा सरकार ने संविधान पर हमला किया. इसने छात्रों पर हमला किया. यह भारत की आत्मा पर हमला है. युवा देश की आत्मा है. नौजवान देश की आत्मा हैं, उनकों प्रदर्शन करने का अधिकार है, आवाज उठाने का हक है, ये हक उनको संविधान ने दिया है.’’ उन्होंने कहा कि युवा विश्वविद्यालय में पढ़ने के लिए जाते हैं, शिक्षा लेने के लिए जाते हैं, आप इनके पुस्तकालय में घुसकर उन्हें पीटते हैं, उन्हें वहां से घसीटते है. हमारा देश एक लोकतांत्रिक देश है, यह तानाशाही नहीं चलेगी.’’

कांग्रेस नेता ने धरने के बाद संशोधित नागरिकता कानून के बारे में पत्रकारों से कहा, ‘‘ यह पूरी तरह से संविधान के खिलाफ है और यह संविधान की भावना को नष्ट करने का तरीका है. हर भारतीय को इसके खिलाफ लड़ना चाहिए.’’ उन्होंने कहा ‘‘ कांग्रेस पार्टी का एक-एक नेता, एक-एक कार्यकर्ता संविधान के लिए लड़ेगा, मोदी सरकार की तानाशाही के खिलाफ लड़ेगा, जवाब मांगेगा और छात्र-छात्राओं के साथ खड़ा रहेगा.’’ प्रधानमंत्री के वक्तव्य से संबंधित एक प्रश्न के उत्तर में प्रियंका ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री जी, जो महिलाओं पर रोज-रोज अत्याचार हो रहा है, उस पर बोलें, रोजगार पर बोलें. जो कल यहां विश्वविद्यालय में हुआ, इस पर बोलें. उन बच्चों को किसकी सरकार और पुलिस ने पीटा? इन चीजों पर बोलें प्रधानमंत्री जी. जो डूबती हुई अर्थव्यवस्था है, इस पर बोलें प्रधानमंत्री जी.’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम सबको एकजुट होकर इस सरकार के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए, क्योंकि ये सरकार अन्याय कर रही है.’’ उन्नाव बलात्कार मामले में भाजपा विधायक कुलदीप सेंगर को दोषी करार दिए जाने के अदालत के फैसले पर पूछे एक अन्य प्रश्न के उत्तर में प्रियंका ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री जी, आज तक उसके बारे में क्यों नहीं बोले हैं? उनकी पार्टी के विधायक ने एक मासूम लड़की का बलात्कार किया, उसके बारे में प्रधानमंत्री जी आज तक चुप क्यों हैं?’’ कांग्रेस महासचिव ने कहा, ‘‘आज विजय दिवस है, आज बांग्लादेश की जंग में हमें विजय मिली थी. तमाम सैनिक जो शहीद हुए, उनको आज फिर हम सम्मान से याद करते हैं. ’’

उन्होंने कहा, ‘‘उनकी शहादत इस लोकतंत्र के लिए हुई, इस संविधान के लिए हुई, इस देश के लिए हुई, ये हमारा देश है, आपका देश है, उन बच्चों का देश है, जिनको आपने कल पीटा, उन महिलाओं का देश है, जिन पर अत्याचार होता है, इसीलिए हमें मिलकर संविधान पर होने वाले हर हमले के खिलाफ लड़ना है.’’ वह बंग्लादेश मुक्ति संग्राम के शहीदों को अमर जवान ज्योति पर श्रद्धांजलि देना चाहती थी लेकिन इंडिया गेट पर बढ़ती भीड़ की वजह से वह ऐसा नहीं कर सकीं.

इस धरने में प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ अहमद पटेल, एके एंटनी, गुलाम नबी आजाद और रणदीप सिंह सुरजेवाला शामिल हुए. इसके अलावा उनके साथ सैकड़ों पार्टी कार्यकर्ता भी थे. प्रियंका वाड्रा ने कहा, ‘‘ देश का वातावरण खराब है. पुलिस (छात्रों) पीटने के लिए विश्वविद्यालय में घुस रही है. सरकार संविधान से छेड़छाड़ कर रही है. हम संविधान के लिए लड़ेंगे.’’ कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने बताया कि शाम चार बजे शुरू हुआ धरना दो घंटे का था और यह जामिया मिल्लिया इस्लामिया तथा अन्य स्थानों के छात्रों के साथ एकजुटता प्रकट करने के लिए किया गया था.

बिना विश्वविद्यालय प्रशासन की इजाजत के पुलिस के जामिया परिसर और उसके पुस्तकालय में घुसकर आंसू गैस के गोले छोड़ने के खिलाफ देशभर के हजारों छात्र सड़कों पर आ गए हैं और घटना की न्यायिक जांच की मांग कर रहे हैं. रविवार को जामिया के पास संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन हो रहा था जो हिंसक हो गया. इसके बाद पुलिस विश्वविद्यालय परिसर में घुस गई. कांग्रेस और कई विपक्षी पार्टियों ने जामिया के छात्रों के खिलाफ कथित ‘बर्बरता’ की निंदा की और मामले की न्यायिक जांच की मांग की. आज़ाद ने कहा, ‘‘ जब विश्वविद्यालय प्रशासन ने पुलिस को प्रवेश की इजाजत नहीं दी, तब पुलिस जामिया में कैसे घुस सकती है और ऐसी बर्बरता कर सकती है?’’

कांग्रेस नेताओं आजाद और कपिल सिब्बल, माकपा नेता सीताराम येचुरी, भाकपा नेता डी राजा, राजद के मनोज झा, सपा के जावेद अली खान और शरद यादव ने संवाददाता सम्मेलन में जामिया के छात्रों पर रविवार को पुलिस की कार्रवाई की निंदा की. नेताओं ने कहा कि वे इस मुद्दे को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के समक्ष उठाएंगे, क्योंकि यह केंद्रीय विश्वविद्यालयों में अशांति से संबंधित है जो सीधे उनके नियंत्रण में आता है. सूत्रों ने बताया कि मंगलवार शाम को यह मुलाकात हो सकती है.

आज़ाद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस आरोप का खंडन किया कि हिंसक प्रदर्शनों के पीछे कांग्रेस का हाथ है. उन्होंने कहा,‘‘ऐसे आरोप लगाना गलत है और हम इसकी निंदा करते हैं.’’ येचुरी ने घटना की उच्चतम न्यायालय के एक न्यायाधीश द्वारा जांच की मांग की. उन्होंने कहा, ‘‘ जामिया परिसर में पुलिस को प्रवेश करने की इजाजत जिस किसी ने भी दी है, उसके खिलाफ मामला दर्ज किया जाना चाहिए और दंडित किया जाना चाहिए.’’ उन्होंने कहा कि यह हिन्दू-मुस्लिम मुद्दा नहीं है और उन्होंने लोगों से अफवाहों के झांसे में नहीं आने को कहा.

येचुरी ने आरोप लगाया, ‘‘ हिंसा के पीछे सत्तारूढ़ पार्टी और भारत सरकार है. अगर सरकार यह कानून नहीं लाई होती, तो ऐसी हिंसा भी नहीं होती. इस हिंसा के लिए प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और कैबिनेट जिम्मेदार है.’’ राजा ने कहा कि पुलिस को जामिया में प्रवेश करने की इजाजत जिसने भी दी है, उसके खिलाफ मामला दर्ज किया जाना चाहिए.

(इनपुट भाषा)