कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन- सिद्धारमैया ने मुख्यमंत्री पद से दिया इस्तीफा, DK शिवकुमार होंगे अगले CM
Karnataka politics Update: कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. सिद्धारमैया ने लोकभवन जाकर राज्यपाल के सचिव को अपना इस्तीफा सौंप दिया है.
सिद्धारमैया ने लोकभवन जाकर राज्यपाल के सचिव को इस्तीफा सौंपा. (Photo- PTI)
Karnataka politics Update: कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. सिद्धारमैया ने लोकभवन जाकर राज्यपाल के सचिव को अपना इस्तीफा सौंपा. डीके शिवकुमार कर्नाटक इस्तीफा सौंपने के बाद सिद्धारमैया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. सिद्धारमैया ने कहा कि राज्यपाल फिलहाल यहां नहीं हैं, वे आज रात लौटेंगे इसलिए मैंने इस्तीफा उनके कार्यालय में जमा कर दिया है.
'आलाकमान ने जो कहा वो किया'
उन्होंने कहा, 'हाई कमान के इस्तीफा देने के लिए कहने के बाद, मैंने आज अपना इस्तीफा सौंप दिया है. मुझे पूरा भरोसा है कि जब राज्यपाल आएंगे, तो वे इसे स्वीकार कर लेंगे, क्योंकि यह संविधान के अनुसार ही किया जाना है...हमारे पास पूर्ण बहुमत है. इसलिए, यह संवैधानिक है कि मुख्यमंत्री को (सरकार बनाने की) अनुमति दी जाए... मैं सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे का तहे दिल से आभार व्यक्त करना चाहूंगा, जिन्होंने मुझे यह अवसर प्रदान किया.'
ब्रेकफास्ट बैठक में इस्तीफे का ऐलान
इससे पहले बेंगलुरु स्थित अपने आवास पर, अपनी सरकार के वरिष्ठ सदस्यों (जिनमें भावी मुख्यमंत्री भी शामिल थे) के साथ हुई ब्रेकफास्ट मीटिंग में सिद्धारमैया ने इस्तीफे का ऐलान किया था. ब्रेकफास्ट मीटिंग में प्रियांक खड़गे, केजे जॉर्ज, एमबी पाटिल, रामलिंगा रेड्डी और एचके पाटिल शामिल थे.
ढाई-ढाई साल का फॉर्मूला?
बता दें कि बीते कई महीनों से लीडरशिप में बदलाव की चर्चा होती रही थी, लेकिन पार्टी ने बार-बार ऐसी खबरों को खारिज किया. कर्नाटक में जब कांग्रेस की सरकार बनी थी उसी समय ढाई-ढाई साल के कार्यकाल की चर्चा थी, जो समय-समय पर उठती रही. कर्नाटक कांग्रेस में लीडरशिप बदलने की अटकलें तब से लग रही थीं, जब सरकार ने पिछले साल अपने ढाई साल का टर्म पूरा किया था. राज्य में कांग्रेस सरकार ने अब तीन साल पूरे कर लिए हैं.
इसके अलावा, पार्टी की प्रदेश इकाई ने X पर 'हम सब एक हैं' शीर्षक से एक पोस्ट भी शेयर किया. यह विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी की ओर से होने वाली संभावित आलोचना का जवाब देने के लिए पार्टी की एकजुटता का एक सार्वजनिक प्रदर्शन था. दोनों नेताओं के एक-दूसरे को गले लगाते और साथ बैठे हुए चित्रों के साथ यह संदेश भी लिखा था: "कल भी, आज भी, और हमेशा... एकता ही हमारी शक्ति है! जनसेवा ही हमारा शाश्वत संकल्प है."
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