नई दिल्ली: नागरिकता संशोधन कानून (Citizenship Amendment Act) के खिलाफ देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहा है. इस बाबत नागरिकता कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है. कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान नागरिकता कानून पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है. साथ ही कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस बाबत रिपोर्ट की मांग की है. कोर्ट ने केंद्र सरकार से जनवरी के दूसरे हफ्ते तक रिपोर्ट तलब करने को कहा है. इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस एस.ए. बोबड़े की अगुवाई वाली बेंच कर रही है. बता दें कि नागरिकता कानून के खिलाफ टीएमसी सांसद मोहुआ मोइत्रा, कांग्रेस नेता जयराम रमेश, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग और असोम गण परिषद ने याचिकाएं दायर की हैं. इस कानून की वैद्दता को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओँ की अगली सुनवाई 22 जनवरी को होगी.

गौरतलब है कि यह विधेयक 9 दिसंबर को लोकसभा द्वारा पारित किया गया था. राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद द्वारा अपनी मंजूरी दिए जाने के एक दिन बाद 11 दिसंबर को राज्यसभा ने विधेयक पारित किया. यह बिल बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के पड़ोसी देशों में उत्पीड़न से भाग रहे हिंदुओं, ईसाई, सिख, पारसी, जैन और बौद्धों को भारतीय नागरिकता प्रदान करता है. जिसके बाद इस बिल के विरोध में काफी प्रदर्शन किया गया. देखते ही देखते ये आग देश के दूसरे राज्यों में भी फैली.

गौरतलब है कि मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार सुनिश्चित करेगी कि पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के गैर मुस्लिम शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता हासिल हो और वे देश में सम्मान के साथ जी सकें. शाह ने नये कानून का विरोध करने वाले लोगों को चुनौती देते हुए कहा कि वे जितना चाहें कानून का विरोध कर सकते हैं.