JEE-NEET Exams: उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को नीट और जेईई परीक्षा मामले में दायर की गई पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया. यह याचिका 6 गैर-भाजपा शासित राज्यों के कैबिनेट मंत्रियों ने दायर की थी. इन मंत्रियों का दावा था कि शीर्ष अदालत छात्रों के ‘जीने के अधिकार’ को सुरक्षित करने में विफल रही है और उसने कोविड-19 महामारी के दौरान परीक्षाओं के आयोजन में आने वाली परेशानियों को नजरअंदाज किया है.Also Read - SC ने तय कर दी विजय माल्या की सजा की तारीख, कहा- प्रत्यर्पण का और इंतजार नहीं कर सकते

इन मंत्रियों का दावा था कि शीर्ष अदालत छात्रों के ‘जीने के अधिकार’ को सुरक्षित करने में विफल रही है और उसने कोविड-19 महामारी के दौरान परीक्षाओं के आयोजन में आने वाली परेशानियों को नजरअंदाज किया है. राष्ट्रीय परीक्षा एजेन्सी (एनटीए), जो दोनों परीक्षाओं का आयोजन करती है, जेईई मुख्य परीक्षा एक से छह सितंबर तक आयोजित कर रही है जबकि नीट की परीक्षाओं का आयोजन 13 सितंबर को होगा. Also Read - दिल्ली के कंस्ट्रक्शन मजदूरों को 5000 रुपये देगी केजरीवाल सरकार, जानें पूरी डिटेल

हालांकि न्यायमूर्ति अशोक भूषण , न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की तीन सदस्यीय पीठ चैंबर में पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया. Also Read - Pollution: सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, क्या सेंट्रल विस्टा के कारण दिल्ली में प्रदूषण बढ़ रहा है, मेट्रो को भी दिया ये आदेश

शीर्ष अदालत का 17 अगस्त यह आदेश अब एक राजनीतिक मुद्दा बन गया था और छह गैर भाजपा शासित राज्यों के मंत्रियों ने इस पर पुनर्विचार के लिये याचिका दायर की थी. याचिका दायर करने वालों में पश्चिम बंगाल के मलय घटक, झारखंड के रामेश्वर ओरांव, राजस्थान के रघु शर्मा, छत्तीसगढ़ के अमरजीत भगत, पंजाब के बी एस सिदधू और महाराष्ट्र के उदय रवीन्द्र सावंत शामिल हैं.

(इनपुट भाषा)