Kisan Andolan: कृषि कानूनों पर जारी गतिरोध को दूर करने के लिए प्रदर्शनकारी किसान संगठनों और तीन केंद्रीय मंत्रियों के बीच आठवें दौर की वार्ता शुक्रवार को भी बेनतीजा रही. अब अगले दौर की वार्ता 15 जनवरी को होगी. इससे पहले केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, रेलवे, वाणिज्य एवं खाद्य मंत्री पीयूष गोयल और वाणिज्य राज्य मंत्री तथा पंजाब से सांसद सोम प्रकाश ने करीब 40 किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ विज्ञान भवन में वार्ता की.Also Read - Farm Laws: केंद्र के पास नहीं किसानों की मौत के आंकड़े, भड़का विपक्ष, किसान डाटा देने को तैयार

किसान नेताओं ने सरकार से कृषि कानूनों को निरस्त करने का आग्रह किया है ताकि वे बिना किसी शिकायत के घर लौट सकें और अपना विरोध समाप्त कर सकें. दूसरी ओर, केंद्र ने स्पष्ट कर दिया कि फिलहाल कृषि कानूनों को निरस्त करना संभव नहीं है. केंद्र ने यह भी जोर देकर कहा कि वार्ता विवादास्पद धाराओं तक सीमित होनी चाहिए और अधिनियमों को पूरी तरह से वापस लेने से इनकार कर दिया. Also Read - Farmers Protest: क्या खत्म हो जाएगा आंदोलन? सरकार ने MSP और दूसरी मांग पर चर्चा के लिए किसान नेताओं से मांगे 5 नाम

अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव हन्नान मोल्ला ने कहा कि सरकार के साथ काफी तीखी चर्चा हुई. उन्होंने कहा, “हमने कहा कि हम कानूनों को निरस्त करने के अलावा कुछ नहीं चाहते हैं। हम किसी भी अदालत में नहीं जाएंगे, यह (कानून वापस लिया जाए) या तो हम लड़ना जारी रखेंगे. 26 जनवरी को हमारी परेड योजना के अनुसार होगी.” Also Read - पंजाब के किसान नेताओं ने MSP पर 30 नवंबर तक जवाब मांगा, एक दिसंबर को SKM की आपात बैठक

अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव ने कहा कि सरकान ने हमें कहा कि कोर्ट में चलो. हम ये नहीं कह रहे कि ये नए कृषि कानून गैर-कानूनी है. हम इसके खिलाफ हैं. इन्हें सरकार वापिस ले. हम कोर्ट में नहीं जाएंगे. हम अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे. सरकार के साथ मुलाकात के बाद एक किसान नेता ने कहा कि 15 जनवरी को सरकार द्वारा फिर से बैठक बुलाई गई है. सरकार कानूनों में संशोधन की बात कर रही है, परन्तु हम कानून वापिस लेने के अलावा कुछ भी स्वीकार नहीं करेंगे.

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा, “तारीख पर तारीख चल रही है. बैठक में सभी किसान नेताओं ने एक आवाज़ में बिल रद्द करने की मांग की. हम चाहते हैं बिल वापस हो, सरकार चाहती है संशोधन हो. सरकार ने हमारी बात नहीं मानी तो हमने भी सरकार की बात नहीं मानी.”

क्या बोले कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर?

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, किसान नेताओं से मुलाकात के बाद कहा कि आज किसान यूनियन के साथ तीनों कृषि क़ानूनों पर चर्चा होती रही परन्तु कोई समाधान नहीं निकला. सरकार की तरफ से कहा गया कि क़ानूनों को वापिस लेने के अलावा कोई विकल्प दिया जाए, परन्तु कोई विकल्प नहीं मिला.

उन्होंने कहा कि सरकार ने बार-बार कहा है कि किसान यूनियन अगर कानून वापिस लेने के अलावा कोई विकल्प देंगी तो हम बात करने को तैयार हैं. आंदोलन कर रहे लोगों का मानना है कि इन क़ानूनों को वापिस लिया जाए. परन्तु देश में बहुत से लोग इन क़ानूनों के पक्ष में हैं. उन्होंने कहा कि किसान यूनियन और सरकार दोनों ने 15 जनवरी को दोपहर 12 बजे बैठक का निर्णय लिया है. मुझे आशा है कि 15 जनवरी को कोई समाधान निकलेगा.

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर वे कृषि कानूनों का समर्थन कर रहे किसान संगठनों को बैठक में शामिल करने पर कहा, “अभी इस प्रकार का कोई विचार नहीं है, अभी हम आंदोलन कर रहे पक्ष से बात कर रहे हैं, परन्तु अगर आवश्यकता पड़ी तो आने वाले समय में सरकार इसपर विचार कर सकती है.”

इससे पहले चार जनवरी को हुई वार्ता भी बेनतीजा रही थी, क्योंकि किसान संगठन तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने की अपनी मांग पर अड़े रहे, वहीं सरकार ‘‘समस्या’’ वाले प्रावधानों या गतिरोध दूर करने के लिए अन्य विकल्पों पर ही बात करने पर जोर दिया.

किसान संगठनों और केंद्र के बीच 30 दिसंबर को छठे दौर की वार्ता में दो मांगों, पराली जलाने को अपराध की श्रेणी से बाहर करने और बिजली पर सब्सिडी जारी रखने को लेकर सहमति बनी थी. बता दें कि सरकार के साथ बातचीत से पहले बृहस्पतिवार को हजारों किसानों ने ट्रैक्टर रैली निकाली. प्रदर्शनकारी किसानों ने कहा कि वे तीनों कानूनों में संशोधन के केंद्र के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करेंगे.

भीषण ठंड के बावजूद पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तरप्रदेश के हजारों किसान एक महीने से ज्यादा समय से दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर डटे हुए हैं. किसान कृषि कानूनों को निरस्त करने, फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानूनी गारंटी देने तथा दो अन्य मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं.

क्या है विवाद?
इस साल सितम्बर में अमल में आए तीनों कानूनों को केंद्र सरकार ने कृषि क्षेत्र में बड़े सुधार के तौर पर पेश किया है. सरकार का कहना है कि इन कानूनों के आने से बिचौलियों की भूमिका खत्म हो जाएगी और किसान अपनी उपज देश में कहीं भी बेच सकेंगे.

दूसरी तरफ, प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों का कहना है कि इन कानूनों से एमएसपी का सुरक्षा कवच खत्म हो जाएगा और मंडियां भी खत्म हो जाएंगी तथा खेती बड़े कारपोरेट समूहों के हाथ में चली जाएगी. विभिन्न विपक्षी दलों और अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों ने भी किसानों का समर्थन किया है, वहीं पिछले कुछ हफ्ते में कुछ किसान संगठनों ने कृषि मंत्री से मुलाकात कर तीनों कानूनों को अपना समर्थन दिया है.

सरकार ने पिछले महीने प्रदर्शनकारी किसान संगठनों को एक प्रस्ताव भेजा था जिसमें नए कानून में सात-आठ संशोधन करने और एमएसपी की व्यवस्था पर लिखित आश्वासन देने की बात कही गयी थी.