नई दिल्ली: देश में बढ़ते कोरोना संकट के बीच राष्ट्रपति, उप राष्ट्रपति व राज्यों के राज्यपाल ने स्वेच्छा से अपनी तनख्वाह में एक साल के लिए 30 फीसदी की कटौती का प्रस्ताव किया है. यही नहीं प्रधानमंत्री और सभी मंत्रियों समेत देश के सभी सांसद 30 फीसदी कम सैलरी लेंगे. दरअसल कोविड-19 के मद्देनजर कैबिनेट ने सांसदों के भत्तों, पेंशन में एक साल के लिए 30 प्रतिशत की कटौती को मंजूरी दी है. Also Read - कोरोना वायरस से प्रभावित टॉप 10 देशों की सूची में पहुंचा भारत, जून के अंत तक बहुत तेजी से बढ़ेंगे मामले

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस बात की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि एक साल तक सांसदों की सैलरी 30 प्रतिशत कम करने पर कैबिनेट की मोहर लग गई है. 1 अप्रैल 2020 से यह फैसला लागू होगा. एक साल तक सांसदों की सैलरी और पूर्व सांसदों की पेंशन में 30 प्रतिशत की कटौती की जाएगी. जावड़ेकर ने कहा, “राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, राज्यों के राज्यपालों ने स्वेच्छा से सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में वेतन कटौती का फैसला किया है. यह पैसा भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) में जाएगा.” Also Read - पंजाब में कोविड-19 के 21 नए मामले सामने आये, कुल संख्या बढ़ कर 2,081 हुई

उन्होंने कहा कि कैबिनेट ने भारत में COVID19 के प्रकोप के स्वास्थ्य और प्रतिकूल प्रभाव को मैनेज करने के लिए 2020-21 और 2021-22 के दौरान MPLAD कोष के अस्थायी निलंबन को मंजूरी दे दी है. 2 साल के लिए MPLAD फंड की राशि (7900 करोड़ रुपए) भारत की संचित निधि में जाएगा.

प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि सांसद निधि का यह पैसा कोरोना के खिलाफ लड़ाई में इस्तेमाल किया जाएगा.