नई दिल्ली: वायु प्रदूषण को कंट्रोल करने की सारी कवायदें फेल होती नजर आ रही हैं. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की वायु गुणवत्ता सोमवार को ‘‘बहुत खराब’’ श्रेणी में दर्ज हुई. अधिकारियों ने बताया कि प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियों एवं हवा में अटके प्रदूषक कणों के धीमे बिखराव के कारण यह स्थिति बनी है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के डेटा के मुताबिक, समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक 382 दर्ज किया गया जो ‘‘बहुत खराब’’ की श्रेणी में आता है.

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डेटा के मुताबिक, दिल्ली के 15 इलाकों में वायु गुणवत्ता ‘‘गंभीर’’ दर्ज की गई जबकि 14 स्थानों पर यह ‘‘बेहद खराब’’ श्रेणी में रही. सोमवार को दिल्ली की हवा में अतिसूक्ष्म कणों – पीएम 2.5 का स्तर 247 दर्ज किया गया जबकि पीएम 10 का स्तर 433 दर्ज किया गया. वायु गुणवत्ता सूचकांक पर शून्य से 50 अंक तक हवा की गुणवत्ता को ‘‘अच्छा’’, 51 से 100 तक ‘‘संतोषजनक’’, 101 से 200 तक ‘‘सामान्य’’, 201 से 300 के स्तर को ‘‘खराब’’, 301 से 400 के स्तर को ‘‘बहुत खराब’’ और 401 से 500 के स्तर को ‘‘गंभीर’’ श्रेणी में रखा जाता है.

भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) के मुताबिक, पीएम2.5 की मात्रा स्थिर मौसमी परिस्थितियों के कारण बढ़ रही है जो दिल्ली में प्रदूषित हवा के द्रव्यमान को जकड़े हुए है. साथ ही उत्तर पश्चिम भारत में पराली जलाए जाने के कुछ असरे के कारण भी ऐसा हो रहा है. केंद्र संचालित वायु गुणवत्ता एवं मौसम पूर्वानुमान प्रणाली (सफर) ने अनुमान जताया है कि वायु गुणवत्ता में सोमवार तक “कुछ हद तक सुधार” हो सकता है.

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