नई दिल्लीः खाने की क्वॉलिटी को लेकर सवालों के घेरे में आए सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने अपने जवानों और अधिकारियों को परोसे जाने वाले खाने की गुणवत्ता एवं मात्रा के परीक्षण का काम डीआरडीओ को सौंपा है. उसने संभावित खामियों को दूर करने के उपाय भी सुझाए हैं. Also Read - भाजपा का उद्धव ठाकरे पर पलटवार, कहा- महाराष्ट्र के सीएम के पास सरकार के काम के बारे में बोलने के लिए कुछ नहीं है

यह कदम तब उठाया गया है जब करीब साल भर पहले एक बीएसएफ जवान ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो डालकर दावा किया था कि जवानों को पानी वाली दाल और जली हुई रोटियां खिलाई जाती हैं. बीएसएफ महानिदेशक के के शर्मा ने एक इंटरव्यू में बताया कि एक संसदीय समिति की सिफारिश के बाद अपनी तरह का यह पहला कदम उठाया गया है. Also Read - अमिताभ बच्चन से अजय देवगन तक, बॉलीवुड हस्तियों ने ऐसे दी दशहरा की बधाई

उन्होंने कहा कि हम बीएसएफ भोजनालयों में परोसे जाने वाले खाने की गुणवत्ता परखने के लिए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की प्रयोगशाला से अध्ययन करवा रहे हैं. उसके विशेषज्ञ खाना पकाने वाले कर्मियों, इस इकाई को चलाने वालों और इस भोजन को खाने वालों से बातचीत कर रहे हैं. Also Read - KKR vs KXIP Dream11 Team Prediction IPL 2020: कोलकाता-पंजाब में होगी रोमांचक जंग, जानें दोनों टीमों के संभावित प्लेइंग XI

उन्होंने कहा कि वैसे तो अंतिम रिपोर्ट का इंतजार है, लेकिन जो हमारी समझ में आया है वह यह है कि जवानों को परोसे जाने वाले खाने की गुणवत्ता एवं मात्रा संतोषजनक से कहीं अच्छी है. डीआरडीओ की मैसूर प्रयोगशाला यह अध्ययन कर रही है.

संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के कर्मियों को अच्छा भोजन प्रदान करना न केवल उन्हें स्वस्थ रखने बल्कि उनका मनोबल ऊंचा रखने के लिए भी जरुरी है. समिति ने परोसे जाने वाले खाने की गुणवत्ता की परख के लिए उचित प्रणाली की सिफारिश की थी. शर्मा ने कहा कि जवान तेज बहादुर के खराब खाना परोसे जाने के दावे के बाद बीएसएफ ने आतंरिक जांच की और पाया कि खाने की गुणवत्ता एवं मात्रा कभी कोई मुद्दा ही नहीं रही.