नई दिल्ली: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और जनता दल (सेकुलर) ने गुरुवार को कर्नाटक विधानसभा चुनाव मिलकर लड़ने की घोषणा की. बसपा नेता सतीश चंद्र मिश्रा और जद (एस) के दानिश अली ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि यह गठबंधन 2019 के लोकसभा चुनाव तक जारी रहेगा. उन्होंने बताया कि दोनों पार्टियां अप्रैल में होने वाले कर्नाटक विधानसभा चुनाव मिल कर लड़ेंगी. 224 सदस्यीय कर्नाटक विधानसभा का कार्यकाल मई में समाप्त हो रहा है. Also Read - Karnataka Panchayat Election Results 2020 LIVE Streaming: यहां देखिए चुनावों के नतीजे, देरी से आएंगे रिजल्ट

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ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि क्या बसपा प्रमुख मायावती ने कर्नाटक में कांग्रेस का ‘खेल’ बिगाड़ने के लिए ऐसा किया है. जातीय आधार पर बंटे कर्नाटक में लिंगायत और वोक्कालिगा दो प्रमुख जातियां हैं जिनका राजनीतिक प्रभाव है. भाजपा के बीएस येदियुरप्पा को लिंगायत समुदाय का तो जनता दल (सेकुलर) के एचडी कुमारस्वामी को वोक्कालिगा समुदाय का नेता माना जाता है. राज्य में इन दोनों जातियों की आबादी क्रमश 17 और 12 फीसदी मानी जाती है. राज्य में करीब 17 फीसदी अल्पसंख्यक भी हैं जिसमें 13 फीसदी मुसलमान और चार फीसदी ईसाई हैं. पिछड़े वर्ग की तादाद भी काफी अधिक है. ये पूरी आबादी के 32 प्रतिशत हैं. कांग्रेस के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया इसी समुदाय से आते हैं. राज्य में अनुसूचित जाति (एसी) के 22 फीसदी से अधिक वोट हैं. Also Read - बसपा नेता सतीश चंद्र मिश्रा ने कहा- भाजपा में ब्राह्मणों को नहीं मिल रहा सम्मान, योगी सरकार सपा के नक्शे कदम पर

लिंगायत और वोक्कालिगा दोनों जातियों का दबदबा

राज्य की राजनीति में लिंगायत और वोक्कालिगा दोनों जातियों का दबदबा है. सामाजिक रूप से लिंगायत उत्तरी कर्नाटक की प्रभावशाली जातियों में गिनी जाती है. राज्य के दक्षिणी हिस्से में भी लिंगायत लोग रहते हैं. सत्तर के दशक तक लिंगायत दूसरी खेतीहर जाति वोक्कालिगा लोगों के साथ सत्ता में बंटवारा करते रहे थे. वोक्कालिगा दक्षिणी कर्नाटक की एक प्रभावशाली जाति है. सत्तर के दशक में कांग्रेस के देवराज उर्स ने लिंगायत और वोक्कालिगा लोगों के राजनीतिक वर्चस्व को तोड़ दिया था. अन्य पिछड़ी जातियों, अल्पसंख्यकों और दलितों को एक प्लेटफॉर्म पर लाकर देवराज उर्स 1972 में कर्नाटक के मुख्यमंत्री बने. जानकारों का मानना है कि मोटे तौर पर अनुसूचित जाति का वोट कांग्रेस को मिलता है, लेकिन अगर बसपा उनका वोट जद (एस) के पक्ष में मोड़ने में सफल रहती है तो कहीं न कहीं इससे कांग्रेस को नुकसान होगा.

20 सीटों पर चुनाव लड़ेगी बसपा

दोनों नेताओं ने घोषणा की कि बसपा राज्य के 14 जिलों में विधानसभा की 8 सुरक्षित सीटों और 12 सामान्य सीटों पर चुनाव लड़ेगी. वहीं, जद (एस) शेष 204 सीटों पर चुनाव लड़ेगा. उन्होंने कहा कि सीटों की इस साझेदारी का लक्ष्य जद (एस) नेता एचडी कुमारस्वामी के नेतृत्व में सरकार का गठन करना है. दोनों ही पार्टियों के राष्ट्रीय अध्यक्ष, एचडी देवगौड़ा और मायावती विधानसभा चुनाव के लिए बेंगलुरू से 17 फरवरी को एक संयुक्त चुनाव प्रचार शुरू करेंगे. अली ने इसे एक महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि इस गठबंधन का भारतीय राजनीति पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा.

उन्होंने कहा कि क्षेत्रियों पार्टियों को अलग- थलग करने की दो बड़ी राष्ट्रीय पार्टियों की कोशिशों को नाकाम करने की इसमें क्षमता है. उन्होंने कहा कि यह पहला मौका है, जब मायावती के नेतृत्व में बसपा हमारे अनुरोध के मुताबिक हमसे चुनावी गठबंधन कर रही है. दानिश अली ने कहा कि बसपा का राज्य में एक मजबूत जनाधार है, जहां अनुसूचित जाति (एसी) के 22 फीसदी से अधिक वोट हैं. कर्नाटक में बसपा की पकड़ के बारे में पूछे जाने पर मिश्रा ने कहा कि पार्टी ने कई विधानसभा सीटों पर स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ते हुए अच्छा खासा वोट हासिल किया है. उन्होंने कहा, ‘1999 में कर्नाटक विधानसभा में हमारा प्रतिनिधित्व था. बसपा ने यहां तक कि तेलंगाना, गुजरात, महाराष्ट्र और जम्मू कश्मीर जैसे राज्यों में अच्छा प्रदर्शन किया है.’

भाषा से इनपुट के साथ