नई दिल्ली: केंद्रीय वित्तमंत्री पीयूष गोयल द्वारा वर्ष 2019-20 के लिए शुक्रवार को पेश किए गए अंतरिम बजट में आयकर में रियायत की घोषणा से हेल्थ सेक्टर को काफी उम्मीदें थीं. लेकिन उन उम्मीदों पर केन्द्रीय बजट खरा नहीं उतर सका. हालांकि स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कुछ पेशेवर इससे संतुष्ट दिखे और इससे स्वास्थ्य विभाग में कुछ तेजी आने की उम्मीद जताई. एसआरएल डायग्नॉस्टिक्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अरिंदम हल्दर कहते हैं, “कुछ महीनों में लोकसभा चुनाव आने वाले हैं तो वित्तमंत्री जी से ऐसे ही अंतरिम बजट की उम्मीद थी.

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कुछ ज्यादा उम्मीदें थीं
उनका कहना था कि हालांकि हमें हेल्थकेयर एवं डायग्नॉस्टिक्स सेक्टर के लिए कुछ ज्यादा उम्मीदें थीं, जो शुरुआत से ही सरकार के लिए मुख्य क्षेत्र रहे हैं. पिछला साल भारत के निजी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के लिए चुनौतीपूर्ण रहा है. बढ़ती प्रतियोगिता के चलते कारोबार की लागत बढ़ी और कुल मिलाकर मंदी रही और ज्यादातर सेक्टर विस्तार के मोड में रहे. कुल मिलाकर सेक्टर निवेश के लिए कम आकर्षक हो गया है, जिसके बिना विकास में रुकावट बनी हुई है.” उन्होंने कहा, “हम मध्यम वर्ग के लिए दी गई प्रस्तावनाओं का स्वागत करते हैं और उम्मीद करते हैं कि लोग स्वास्थ्य सेवाओं एवं निवारक देखभाल पर ज्यादा खर्च करेंगे. इसके अलावा बजट में ‘आयुष्मान भारत’ के लिए किए गए आवंटन सराहनीय हैं. अगले कुछ सालों में देश के सभी लोगों के लिए सार्वभौमिक चिकित्सा सेवाओं का लक्ष्य हासिल करने के लिए सरकार को निजी स्वास्थ्य सेवा एवं नैदानिक सेवा प्रदाताओं के साथ साझेदारियों पर ध्यान देना होगा.”

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स्वास्थ्य सेवाएं किसी भी अर्थव्यवस्था की रीढ़
नोएडा स्थित जेपी हॉस्पिटल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) डॉ. मनोज लुथरा ने कहा, “आज के बजट में वित्तमंत्री जी द्वारा दिए गए प्रस्ताव सराहनीय हैं. गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता पर ध्यान देने से भारतीयों के जीवन जीने और काम करने के तरीके में बदलाव आएगा. राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना- ‘आयुष्मान भारत’, सभी को गुणवत्तापूर्ण एवं किफायती स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के प्रधानमंत्री जी के दृष्टिकोण को पूरा करने में कारगर साबित हो रही है.

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इस योजना के तहत पहले से 10 लाख गरीब एवं वंचित लोग नि:शुल्क स्वास्थ्य सेवाओं से लाभान्वित हो चुके हैं. जरूरी दवाओं, कार्डियक स्टेंट एवं नी इम्प्लांट की कीमतों में कमी के चलते बड़ी संख्या में गरीब एवं मध्यमवर्गीय लोगों को फायदा हुआ है. उन्होंने कहा, “स्वास्थ्य सेवाएं किसी भी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं तथा स्वस्थ भारत के विकास को जारी रखने के लिए जरूरी दृष्टिकोण है, जो अगले पांच सालों में हमें पांच ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनने में योगदान दे सकता है. मैं सभी के लिए व्यापक स्वास्थ्यसेवा प्रणाली की दिशा में सरकार के सकारात्मक दृष्टिकोण का स्वागत करता हूं.”
(इनपुट एजेंसी)