Budget Session 2021: पांच राज्यों में होनेवाले विधानसभा चुनाव की गहमागहमी के बीच संसद  के बजट सत्र का दूसरा चरण आज से शुरू हो  गया है. बजट सत्र के दूसरे चरण में जहां सरकार का ध्यान मुख्य रूप से वित्त विधेयक और वित्त वर्ष 2021-22 के लिए अनुदान की अनेक अनुपूरक मांगों को पारित कराने पर होगा. राज्यसभा में पेट्रोल-डीजल की बढ़ी कीमतों पर चर्चा करने की मांग को लेकर कांग्रेस के हंगामे के बाद कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित हो गई. Also Read - बंगाल में भाजपा के सत्ता में आने के बाद गोरखा समस्या का समाधान हो जाएगा: अमित शाह

बता दें कि विपक्ष के हंगामे की वजह से पहले सदन को दोपहर 1.30 बजे तक स्थगित किया गया था. इसके पहले विपक्ष के हंंगामे के कारण 11 बजे तक फिर दोपहर 1 बजे तक के लिए सदन की कार्यवाही को स्थगित किया गया था. Also Read - WB Assembly Electons 2021: ममता बनर्जी के बाद अब भाजपा नेता राहुल सिन्हा पर EC का एक्शन, लगाना 48 घंटे का बैन

सरकार ने कुछ अनिवार्य एजेंडों को पारित करने के अलावा, इस सत्र में कई विधेयकों को भी पारित कराने के लिए सूचीबद्ध किया है. इस सत्र का समापन आठ अप्रैल को होगा. बता दें कि चार राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए चल रहे प्रचार के बीच यह चरण सरकार के लिए अहम है तो वहीं विपक्ष के लिए भी इस चरण को महत्वपूर्ण माना जा रहा है. Also Read - ममता बनर्जी का चुनाव आयोग से अनुरोध, 'केवल बीजेपी की ही नहीं, सभी की सुनें'; लगाया पक्षपात का आरोप

बजट सत्र के दूसरे चरण में ये विधेयक हो सकते हैं पारित
सरकार ने बजट सत्र के दूसरे चरण के लिए जन विधेयकों को सूचीबद्ध किया है उनमें पेंशन निधि नियामक एवं विकास प्राधिकरण (संशोधन) विधेयक, राष्ट्रीय वित्त पोषण अवसंरचना और विकास बैंक विधेयक, विद्युत (संशोधन) विधेयक, क्रिप्टो करेंसी एवं आधिकारिक डिजिटल मुद्रा नियमन विधेयक शामिल हैं.

विपक्ष ने सरकार को घेरने की पूरी तैयारी की है 
बजट सत्र के इस दूसरे चरण में विपक्ष विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने के लिए कमर कसकर तैयार है. बजट सत्र के दूसरे चरण से पहले कांग्रेस की संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने रविवार को पार्टी के नेताओं के साथ वर्चुअल मीटिंग की थी. इस बैठक में जी-23 के आनंद शर्मा और मनीष तिवारी के अलावा राज्यसभा में हाल ही में विपक्ष के नेता बने मल्लिकार्जुन खड़गे और कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी शामिल हुए.

छाया रहेगा किसानों का मसला

इसके बाद कृषि कानून विरोधी आंदोलन के 100 दिन बीत जाने के बाद भी उनकी मांगों की अनदेखी का सवाल उठाते हुए किसानों के मुद्दे पर अलग से बहस की मांग उठाई जाएगी. इसके साथ ही इंटरनेट मीडिया में मनमुताबिक नैरेटिव का प्रचार करने के लिए कथित तौर पर आई जीओएम की सिफारिशों और उत्तर प्रदेश में महिलाओं के साथ बढ़ते अपराध और उनकी सुरक्षा के मुद्दे को भी संसद में उठाया जाएगा.