नई दिल्लीः चक्रवाती तूफान बुलबुल देर रात को बंगाल के तट पर पहुंचा. बुलबुल ने करीब 2 बजे के बाद बंगाल के तटीय इलाको में पहुंच कर भारी बारिश की. तूफान की वजह से कई क्षेत्रों से भू स्खलन की भी खबरें आई हैं. मौसम विभाग के अनुसार यह तूफान सुंदरबन नेशनल पार्क से करीब 12 किमी दक्षिण पश्चिम की ओर बना हुआ है. बारिश और भू स्खलन की वजह से सुंदरबन नेशनल पार्क को भी नकुसान पहुंचा है.

हालांकि रविवार सुबह होते होते यह तूफान थोड़ा धीमा हो गया था और इसने अपनी दिशा भी बदल ली. सूचनाओं के अनुसार अब यह बांग्लादेश की तरफ बढ़ गया. हालांकि इस दौरान यहां तेज हवाएं चली और कई जगह पेड़ गिरने की घटनाएं भी सामने आई. तूफान की वजह से राज्य में अब तक 2 लोगों की मौत हो चुकी है. बुलबुल तूफान की वजह से सबसे ज्यादा नुकसान ओडिशा को हुआ. तूफान की वजह से यहां सैकड़ो पेड़ गिर गए जिसकी वजह से पूरा जन जीवन अस्त व्यस्त हो गया. प्रशासन ने राहत बचाव टीमों को किसी भी आपदा से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा है.

 

भारतीय मौसम विभाग की जानकारी के अनुसार इस तूफान के कारण कोलकाता में लगभग 50-60 किमी की रफ्तार से हवाएं चल रही हैं. तूफान प्रभावित इलाकों में राहत बचाव कार्य जारी है. कोलकाता के नेताजी सुभाष चन्द्र बोस अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर 12 घंटों के लिए सभी उड़ाने रद्द कर दी गई हैं. 24 परगना क्षेत्र से हजारों की संख्या में लोगों को दूसरे स्थान में शिफ्ट किया गया है.

वहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी चक्रवाती तूफान को लेकर ट्वीट किया. उन्होंने ट्वीट में लिखा, ‘तूफान बंगाल से गुजरने वाला है. हमारा राज्य प्रशासन स्थिति पर कड़ी निगरानी रख रहा है. हम किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए हर तरह की तैयारी कर चुके हैं. एनडीआरएफ-एसडीआरएफ ने स्पेशल कंट्रोल रूम स्थापित किया है.’ उन्होंने यह भी कहा कि स्कूल, कॉलेज और आंगनबाड़ी केंद्रों को बंद रखा गया है. वहीं संवेदनशील तटीय इलाकों से 1 लाख 20 हजार से भी अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है.


इसके अलावा ओडिशा में भी इस तूफान के चलते कृषि को नुकसान की खबर है. ओडिशा के स्पेशल रिलीफ कमिश्नर प्रदीप जेना ने बताया, ‘शुरुआती आकलन से पता चलता है कि उत्तरी-तटीय जिलों में 6 लाख हेक्टेयर खेत पर 30 से 40 प्रतिशत धान की फसल को चक्रवात बुलबुल के कारण काफी नुकसान हुआ है.’ मौसम विभाग ने कहा है कि तूफान धीमा जरूर दिख रहा है लेकिन खतरा अभी पूरी तरह से टला नहीं है. अधिकारियों ने कहा कि अभी अगले 6 से 8 घंटे तक कुछ भी नहीं कहा जा सकता.