नई दिल्ली: दिल्ली के बुराड़ी में एक ही परिवार के 11 लोगों की मौत के बाद पुलिस इन लोगों में से एक व्यक्ति की मानसिक स्थिति की जांच कर रही है. बताया जा रहा है कि अपने पिता की मौत के बाद 45 साल के ललित भाटिया अपने पिता के नाम पर कर्मकांड करता था और परिवार के अन्य लोगों से कहता था कि उसके पिता की आत्मा उसके अंदर प्रवेश कर गई है और कई मुद्दों पर वह राय देती है. इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक ललित भाटिया के पिता भोपाल सिंह की 2008 में मौत हो गई थी. भोपाल सिंह भूतपूर्व सैनिक थे जिन्होंने घोड़े से गिरने के बाद पैर में लगी चोट के कारण स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी.

गौरतलब है कि ललित भाटिया और अन्य 9 लोगों का  शव लटका हुआ मिला था, उनकी आंखों पर बेड पर पड़े बेडशीट के कपड़े से पट्टी बंधी थी. वहीं बुजुर्ग नारायणी का शव दूसरे कमरे में फर्श पर पड़ा मिला था. पुलिस के अनुसार ललित हर दिन डायरी लिखता था जिसमें वह घर के हर सदस्य की गतिविधि के बारे में लिखता था. पुलिस के सूत्रों ने बताया कि घर में रखे रजिस्टर जिसमें मौत से जुड़ी कहानी लिखी गई है और इस डायरी में लिखी गई हैंडराइटिंग को मिलाने के लिए एक्सपर्ट के पास भेजा गया है.

सूत्रों का कहना है कि पिता की मौत के बाद ललित भाटिया बहुत अंतर्मुखी स्वभाव का हो गया था. वह दूसरों से बहुत कम बातचीत करता था. पिता की मौत के बाद उसने पेड़ की पूजा और जानवरों को खाना खिलाना शुरू कर दिया था. एक दिन उसने परिवार के सदस्यों से कहा कि उसके पिता की आत्मा उसके अंदर प्रवेश कर गई है और वह अच्छी जिंदगी जीने की सलाह दे रही है. 2013 के बाद अपने पिता की आत्मा के कहने पर उसने डायरी लिखना शुरू किया था. बताया जा रहा है कि परिवार धार्मिक था और उस पर यकीन करता था.

परिवार राजपूत परिवार से था. राजस्थान से दो दशक पहले दिल्ली आ गए थे. एक बार ललित के ऊपर उसकी दुकान में प्लाईवुड के दो तख्त गिर गए. ललित को भरोसा था कि उसके कर्मकांड की वजह से ही उसकी जान बची. बताया जा रहा है कि जिस दिन ये घटना घटी उस दिन भी परिवार में कर्मकांड हुए थे. रजिस्टर मे बरगद के पेड़ की पूजा की बात है. परिवार ने 27 जून को बरगद के पेड़ की पूजा की थी क्योंकि उस दिन वट पूर्णिमा थी. जिस तरह के 10 शव लटके मिले थे वह बरगद के पेड़ की बनावट की तरह थे.