नई दिल्ली। बुराड़ी में रविवार 1 जुलाई को एक घर में संदिग्ध हालत में मृत पाए गए भाटिया परिवार के 15 साल के शिवम और ध्रुव होशियार छात्र थे और संगीत में रूचि रखते थे. इनकी बड़ी बहन मीनू (मेनका) ने भी उत्तरी दिल्ली स्थित तिमारपुर के वीरेंद्र पब्लिक स्कूल (वीपीएस) से पढ़ाई की थी. वह स्कूल में हमेशा अव्वल आती थी. स्कूल के एक प्रतिनिधि ने बताया कि जांचकर्ताओं ने इस मामले में उनसे भी संपर्क किया.

होनहार छात्र थे शिवम और ध्रुव

नौंवी कक्षा के शिवम और ध्रुव (धीरेंद्र) हरफनमौला छात्र थे. उन्होंने कहा, वे बचपन से ही यहीं पढ़ रहे थे और पढ़ाई में काफी अच्छे थे. पाठ्यक्रम से इतर गतिविधियों में भी काफी बढ़ – चढ़कर हिस्सा लेते थे. उनकी बड़ी बहन मेनका ने भी हमारे स्कूल से ही पढ़ाई की थी और वह स्कूल की टॉपर थी. किसी भी अध्यापक को उनके व्यवहार से कोई शिकायत नहीं थी. टीचरों ने कहा कि दोनों लड़कों के अभिभावक नियमित रूप से अभिभावक शिक्षक बैठक (पीटीएम) में आते थे और कक्षा में अपने बच्चों के प्रदर्शन में काफी रूचि रखते थे.

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फंदे पर लटके मिले थे 10 सदस्य

गौरतलब है कि भाटिया परिवार के 11 सदस्यों में से 10 रविवार को फंदे पर लटके पाये गये थे जबकि 77 वर्षीय नारायण देवी का शव मकान के एक अन्य कमरे में फर्श पर पड़ा मिला था. देवी की बेटी प्रतिभा (57), उनके दो पुत्र भवनेश (50) और ललित भाटिया (45) भी मृतकों में शामिल हैं. भवनेश की पत्नी सविता (48) और उनके तीन बच्चे मीनू (23), निधि (25) और ध्रुव (15) भी मृत मिले थे.

बेटी की होने वाली थी शादी

ललित भाटिया की पत्नी टीना (42) और उसका 15 वर्षीय पुत्र शिवम भी मृत पाया गया था. प्रतिभा की बेटी प्रियंका (33) की पिछले महीने ही सगाई हुई थी और उसकी इस साल के अंत में शादी होने वाली थी. प्रियंका भी फंदे पर लटकी मिली थी. पुलिस अब तक मामले की गुत्थी सुलझा नहीं पाई है. हालांकि कमरे से मिले सबूत साफ इशारा कर रहे हैं कि मामला अंधविश्वास, कर्मकांड और अदृश्य आत्मीय शक्ति से जुड़ा हुआ है. घर से मिली कई डायरी में लिखा हुआ है कि किस तरह अनुष्ठान करना है और आंखों हाथों पर कैसे पट्टियां बांधनी है. फंदे से लटके सभी मृतकों की आंखों और हाथों पर पट्टी बंधी हुई थी जबकि गले में चुन्नी लिपटी हुई थी. मामले की जांच दिल्ली क्राइम ब्रांच कर रही है. बताया जा रहा है कि परिवार भ्रम मनोविकार का शिकार था.