नई दिल्ली। दिल्ली के बुराड़ी में रहस्यमय परिस्थितियों में हुई 11 मौतों के एक सप्ताह बाद भी पुलिस को इस कथित सामूहिक आत्महत्या से संबंधित रहस्य से पर्दा उठाना बाकी है. पुलिस हाल के दिनों में राष्ट्रीय राजधानी में सबसे सनसनीखेज मामलों में से एक इस मामले को सुलझाने के लिए मनोविज्ञान, अंधविश्वास और नवीनतम जांच तकनीकों से छानबीन कर रही है. लेकिन अब तक पुलिस की ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच पाई है. Also Read - कम की गई केजरीवाल की सुरक्षा, हटाए गए दिल्ली पुलिस के कमांडो? जानिए क्या बोला गृह मंत्रालय

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बुराड़ी में एक सप्ताह पहले अपने घर के भीतर एक परिवार के 11 सदस्य मृत पाए गए थे. उनके मुंह सफेद कपड़े से ढके हुए थे. इन लोगों के हाथ और पैर बंधे हुए थे. आंखों पर पट्टियां थीं और गले पर चुन्नियां बंधी हुई थी. इससे इनकी मौत का रहस्य और उलझ गया. Also Read - पूर्व IFS अधिकारी ने खुद को मारी गोली! कई देशों में रह चुके हैं भारत के राजदूत

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इस मामले को लेकर कई सारे सवाल है जैसे ‘ क्या यह एक हत्या या आत्महत्या थी ?, अगर यह एक हत्या थी तो ऐसी क्रूर हत्याओं को अंजाम देने में कौन व्यक्ति शामिल थे और उनका क्या उद्देश्य था? अगर परिवार ने आत्महत्या की थी तो क्या कारण हो सकता है कि 11 सदस्य ऐसा कदम उठाने के लिए प्रेरित हो सकते थे. लेकिन न तो जांचकर्ताओं और न ही परिवार के करीबी सदस्यों के पास कोई सबूत हाथ लगा है.

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परिवार के सदस्य हालांकि आरोप लगाते रहे है कि यह एक हत्या है लेकिन कोई ठोस वजह या उद्देश्य नहीं बता सके. इस मामले को लेकर विमहन्स में डॉक्टरों के साथ अनाधिकारिक रूप से चर्चा करने वाली पुलिस ने बताया था कि परिवार साझा मनोविकृति से ग्रस्त हो सकता है.

घर से मिली डायरी में कई राज

पुलिस अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है ताकि मनावैज्ञानिक शव परीक्षण की प्रक्रिया को शुरू किया जा सके. पुलिस का मानना है कि परिवार ने किसी अंधविश्वास और धार्मिक कर्मकांड के चलते अपनी जान दी. घर से मिली डायरियां इसी ओर संकेत कर रही है. इनमें लिखा है कि सभी को नियम पर चलना है, आंखों-हाथों पर पट्टियां बांध लेनी है. परम आत्म से मिलने के लिए एक हो जाना है. सात दिन नियम से पूजा पाठ करना है.

बहरहाल, पुलिस इस बात की छानबीन कर रही है कि 15 से 77 साल तक की उम्र के 11 सदस्यों ने आपसी सहमति से कहीं खुदकुशी तो नहीं की. पुलिस ने इस पहलू पर जांच उस वक्त शुरू की जब कल उसे घर में हाथ से लिखे गए नोट्स मिले , जिसमें इन मौतों के पीछे कोई धार्मिक या आध्यात्मिक पहलू होने के संकेत थे. हाथ से लिखे गए नोटों में कहा गया है कि मानव शरीर अस्थायी है. अपनी आंखें और मुंह बंद करके डर से उबरा जा सकता है.