नई दिल्ली. बुराड़ी में एक ही परिवार के 11 लोगों की रहस्यमयी मौत पर हर कोई हैरान है. इस मामले में नए नए एंगल सामने आ रहे हैं. अब तक की छानबीन में अंदेशा जताया जा रहा है कि परिवार ने धार्मिक कर्मकांड करते हुए अपने प्राणों की आहुति दे दी. हालांकि आसपास के लोगों और रिश्तेदारों को ऐसी किसी थ्योरी पर भरोसा नहीं हो रहा है. इनका कहना है कि ये परिवार बेहद घुल मिलकर रहता था और लोगों की मदद के लिए तत्पर रहता था. परिवार में आर्थिक संकट जैसे भी कोई संकेत नहीं मिले हैं. रिश्तेदारों का कहना है कि इसे साजिश के तहत अंजाम दिया गया.

इन बातों से और गहराया रहस्य

कुछ बातों से रहस्य और गहरा गया है. सबसे बड़ा रहस्य ये कि घर की दीवार में 11 पाइप क्यों लगे थे? इनका परिवार से क्या लेना देना था? इनमें 7 पाइप सीधे और 4 पाइप मुड़े हुए थे. खास बात ये है कि मरने वालों में 7 पुरुष और 4 महिलाएं थीं. इन पाइपों से पानी निकलने के भी कोई चिन्ह् नहीं मिले हैं. इसे परिवार के किसी कर्मकांड से ही जोड़ा जा रहा है. इसी तरह सभी के गले में चुन्नी पाए जाने से भी इस थ्योरी को बल मिला है. मौत से पहले क्यों इन्होंने चुन्नियां डाली हुई थी?

नोट्स में लिखी अनुष्ठान की बातें

इससे भी बड़ा रहस्य घर में मिले नोट्स से गहरा गया है. इनमें साफ लिखा हुआ है कि आंखों, हाथों पर पट्टियां बांध लो. शून्य के अलवा कुछ और नहीं दिखना चाहिए. अगर पट्टियां बच जाएं तो डबल कर लो. श्रद्धा के साथ सात दिनों तक लगातार बरगद के वृक्ष की पूजा करो. अगर कोई घर आए तो यह कार्य अगले दिन करो. इसके लिए गुरुवार या रविवार का दिन चुना.

बुराड़ी सामूहिक मौतें: रिश्तेदार नहीं मान रहे सुसाइड, बताया साजिश के तहत हत्या

नोट में लिखा है, श्रद्धा के साथ सात दिनों तक लगातार बरगद के वृक्ष की पूजा करें. अगर कोई घर आए तो यह कार्य अगले दिन करें. इसके लिए गुरुवार या रविवार का दिन चुनें. आगे लिखा है, अगर बुजुर्ग महिला (नारायण देवी) खड़ी नहीं हो सकती हैं तो वह दूसरे कमरे में लेट सकती हैं. अनुष्ठान के लिए मद्धिम प्रकाश का उपयोग करें. रात 12 बजे से एक बजे के बीच अनुष्ठान करें, ताकि कोई तुम्हें बाधा न पहुंचाए. जब तुम सब उस दौरान फांसी पर लटक जाओगे तो भगवान अचानक प्रकट होंगे और उसी क्षण तुम्हें बचा लेंगे. इन बातों से ऐसा लगता है कि ये परिवार अंधविश्वासी था और कर्मकांडों पर काफी भरोसा रखता था और खास पूजा-कर्मकांड में लिप्त था.

क्या मानसिक रूप से तैयार था परिवार? 

परिवार के बच्चों के शव लटके हुए मिले थे. तो क्या इन्हें भी पूरी योजना के साथ फंदे से लटकाया गया था? क्या घर के सभी लोग इस तरह का कदम उठाने के लिए मानसिक रूप से तैयार थे? बच्चों ने शोर क्यों नहीं मचाया? क्या ये परिवार किसी तरह के कर्मकांड में लगा हुआ था और मोक्ष की खातिर खास पूजा कर रहा था? एक बड़ा सवाल ये भी है कि आखिर जिस परिवार में हाल ही में एक लड़की की शादी तय हुई थी, 17 जून को बड़ा जश्न हुआ था वो परिवार ऐसा कदम कैसे उठा सकता है.

पुलिस के सामने कई सवाल

पुलिस के सामने कई सवाल मुंह बाएं खड़े हैं, अब तक उसे कोई खास सुराग नहीं मिला है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी बता रही है कि किसी तरह के संघर्ष के कोई निशान नहीं हैं. यानि सभी 11 लोगों की मौत बिना किसी जोर जबरदस्ती के हुई है. ये तथ्य इशारा कर रहे हैं कि इनकी मौत किसी अंधविश्वास के चलते हुई है और इन्होंने खुद ही इसे अंजाम दिया है. लेकिन रिश्तेदार और परिचित इस थ्योरी से बिल्कुल सहमत नहीं है. वे इसे साजिश के तहत हुई हत्या करार दे रहे हैं.