नई दिल्ली. केंद्र सरकार द्वारा यूपीएससी के जरिए चुने जाने वाले आईएएस, आईपीएस जैसे अफसरों की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव की सूचना पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी सहित दूसरे दल के नेताओं ने विरोध जताया है. वहीं, दूसरी तरफ सोशल साइट्स पर #ByeByeUPSC हैशटैग से ट्वीट कर कुछ लोग आलोचना कर रहे हैं तो कुछ लोग सरकार के पक्ष में तर्क देते नजर आ रहे हैं.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार लाल बहादुर शास्त्री नेशनल एकेडमी ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन (LBSNAA) में होने वाले फाउंडेश कोर्स को यूपीएससी कैंडीडेट्स में शामिल करना चाहती है. अभी तक के नियमों के मुताबिक, यूपीएससी क्वालिफाई कैंडिडेट्स आईएएस, आईपीएस, आईएफएस और दूसरे सेंट्रल डिपार्टमेंट में अप्वाइंट किया जाता है. इसके बाद वह LBSNAA में ट्रेनिंग के लिए जाते हैं, जहां तीन महीने के लिए फाउंडेशन कोर्स होता है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, केंद्र सरकार सेंट्रल डिपार्टमेंट के प्रोसे और LBSNAA के ट्रेनिंग को मिलाना चाहती है. इससे फाउंडेशन कोर्स में दिए परफॉर्मेंस के आधार पर कैंडीडेट्स को सर्विस और कैडर अलॉट होगा. बता दें कि फाउंडेशन कोर्स में कई तरह की एक्टिविटी होती है. इसके 400 मार्क्स होते हैं. हालांकि, साल 1989 में यूपीएससी के चयन में बदलाव का प्रस्ताव भेजा जा चुका है.

केंद्र सरकार के इस प्रस्ताव के बाद राहुल गांधी ने ट्वीट किया. उन्होंने आरोप लगाया कि इससे छात्रों का भविष्य खतरे में है. उन्होंने इस मुद्दे पर आरएसएस को भी आड़े हाथों लिया. उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस चाहता है कि सिविल सर्विसेज में अपने पसंद के अफसर हों.

दूसरी तरफ सपा नेता शिवपाल यादव ने भी ट्वीट कर इसका विरोध किया है. उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रस्ताव का वह कड़ी निंदा करते हैं.